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Champawat News: भारत-नेपाल सीमा तीन दिन के लिए सील, आवागमन बंद

Tue, 03 Mar 2026 10:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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बनबसा (चंपावत)। नेपाल में पांच मार्च को चुनाव के चलते भारत-नेपाल सीमा सोमवार शाम पांच बजे से सील कर दी गई है। यह बंदी पांच मार्च की देर शाम तक रहेगी, आवागमन पूरी तरह रुक जाएगा। बनबसा और नेपाल प्रशासन ने सोमवार दो मार्च को यह कार्रवाई की। सीमा पर केवल गंभीर मरीजों को ही भारत आने की अनुमति है। उन्हें पहचान पत्र दिखाना होगा। मंगलवार को पड़ताल के दौरान सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और पुलिस मुस्तैद नजर आई। पुलिस, एसएसबी के अलावा खुफिया तंत्र भी सीमा पर चौबीसों घंटे नजर रख रहा है। बनबसा थानाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कोरंगा ने शारदा बैराज चौकी पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। एसएसबी 57वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट मनोज कुमार ने बूम से सुंदर नगर तक पैनी नजर रखने को कहा है।
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बाजार में दिखा असर
भारत नेपाल सीमा सील होने से बनबसा बाजार के कारोबार पर असर पड़ा है। चहल पहल वाली बाजार में भीड़ न के बराबर रही। व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने बताया कि मंगलवार को नेपाली खरीदारों के बनबसा नहीं पहुंचने से प्रतिदिन की अपेक्षा 80 फीसदी कारोबार प्रभावित हुआ है। बताया कि बनबसा बाजार का अधिकांश कारोबार नेपाली नागरिकों पर निर्भर रहता है। इधर, भारत नेपाल सीमा सील होने से नेपाल कैसीनों जाने वाले भी तीन दिनों तक बेचैनी महसूस करेंगे। संवाद

03सीपीटी03 पी-भारत-नेपाल सीमा सील होने पर बनबसा शारदा बैराज पर बंद गेट। संवाद

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टनकपुर सीमा 72 घंटे के लिए सील, सिद्धबाबा के दर्शन को तरसे श्रद्धालु

टनकपुर (चंपावत)। नेपाल में पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा को 72 घंटे के लिए पूरी तरह सील कर दिया गया है। इसके चलते शारदा बैराज मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा और आवाजाही पूरी तरह ठप रही। सीमा सील होने का सबसे अधिक असर मां पूर्णागिरि के दर्शन कर सिद्धबाबा ब्रह्मदेव मंडी जाने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ा। सीआईएसएफ और एसएसबी ने बैरियर लगाकर श्रद्धालुओं को आगे जाने से रोक दिया। इस बीच बैराज से वापस लौट रहे यूपी के जिला लखीमपुर खीरी के जत्थे में शामिल श्रद्धालु अमित कुमार, पुष्पेंद्र, गगन आदि ने बताया कि सुबह ही उन्होंने मां पूर्णागिरि के दर्शन किए थे। वह सिद्धबाबा के दर्शन को जा रहे थे। उनको चुनाव के चलते नहीं जाने दिया गया। उन्होंने शारदा नदी पार से सिद्धबाबा को हाथ जोड़कर पूजा की और फिर वापस लौट गए।
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