जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में तीन दिनी कार्यशाला संपन्न हो गई। कार्यशाला में क्रियात्मक शोध अवधारणा, उसके सोपानों, अभिलेखीकरण आदि व्यापक चर्चा-परिचर्चा की गई। शिक्षकों ने शीघ्र ही अपने स्कूल से क्रियात्मक शोध को डायट में जमा करवाने की बात कही।
समन्वयक डॉ. पारुल शर्मा ने बताया कि शैक्षिक अनुसंधान के क्षेत्र में क्रियात्मक अनुसंधान तेजी से उभरती हुई नई प्रवृत्ति है। क्रियात्मक शोध शिक्षकों को वह सामर्थ्य देता है, जिससे शिक्षण अधिगम के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं का अपने स्तर से समाधान खोजते हैं। समापन पर डायट के प्राचार्य केसी शाक्य ने विद्यालय परिवेश में शैक्षिक गुणवत्ता में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यशाला में डॉ. नवीन जोशी, डॉ. कल्पना लखेड़ा संदर्भ दाता रहे। डॉ. अवनीश शर्मा, डॉ. अनिल मिश्र, राजेश पांडेय, लता आर्या, नवीन ओली आदि ने भी विचार रखे। विद्यालयी प्रणाली में सुधार के मकसद से हुए इस प्रशिक्षण में राजकीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों के 30 सेवारत शिक्षकों ने हिस्सा लिया।