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बीपीएल किसान को बता दिया आयकर दाता, वसूली के भी आदेश दिए

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चंपावत। मारागांव के किसान मोहन सिंह माहरा ने न कभी आयकर रिटर्न भरा और न ही उनकी आमदनी इस लायक रही कि वह आयकर दाताओं की श्रेणी में आ सकें। फिर भी उन्हें आयकर दाता बताकर मिल रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त बंद कर दी गई। मोहन सिंह को अब दी गई राशि भी वापस करनी होगी।
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वर्ष 2002 की आर्थिक गणना के मुताबिक पाटी ब्लॉक के मारागांव के मोहन सिंह माहरा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी में आते हैं। अब भी उनकी आय पांच हजार रुपये मासिक से कम है। इसलिए उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था। पात्र होने पर उन्हें हर चार महीने में देय दो हजार रुपये की किस्त मिलने लगी। ये किस्त पांच बार मिली। पिछले साल से किस्त आनी बंद हो गई, उल्टा कृषि विभाग का नोटिस भी आ गया। इसमें उन्हें आयकर दाता बताकर पांच किस्त के रूप में मिले 10 हजार रुपये वापस करने के आदेश दिए गए। इस नोटिस से बुजुर्ग मोहन सिंह सकते में आ गए। उन्होंने डीएम दरबार में दस्तक दी है। डीएम को सौंपे पत्र में उन्होंने आयकर के दायरे में न आने के बावजूद आयकर दाता बताने की शिकायत कर निधि का लाभ भी दिलवाने की मांग की है। हालांकि कृषि आमदनी आयकर के दायरे से मुक्त है और वैसे भी सालभर में 2.50 लाख रुपये तक की आमदनी पर आयकर देय नहीं है। (संवाद)
जिलेे के 337 आयकर दाता किसानों को वापस देने होंगे 32 लाख रुपये
चंपावत। राजस्व परिषद ने पिछले साल नवंबर में आयकर देने के बावजूद पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ उठाने वाले किसानों से वसूली करने के आदेश दिए थे। इस श्रेणी के प्रदेशभर के 9053 किसानों में से 337 चंपावत जिले के हैं। इन किसानों से 32.16 लाख रुपये की वसूली होनी थी। इसमें से करीब पांच लाख रुपये की वसूली हो चुकी है। केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की थी। इसके तहत किसानों को हर साल दो हजार-दो हजार रुपये की तीन किस्तें दी जातीं हैं। इस साल 14 मई को निधि के तहत आठवीं किस्त जारी की गई है। योजना के तहत जिले में 37684 किसान पंजीकृत हैं। आयकर विभाग से बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड नंबर से मिलान कर पीएम किसान सम्मान पोर्टल के सत्यापन से ये गड़बड़ी उजागर हुईं थीं। (संवाद)
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कोट
आयकर के दायरे में आने वाले किसानों की सूची कृषि विभाग ने नहीं बनाई। यह सूची बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड नंबर से मिलान कर आयकर विभाग ने भेजी थी। इस सूची के आधार पर कृषि विभाग ने किसानों को नोटिस भेजा था। राजस्व परिषद के वसूली आदेश के बावजूद राजकोष में धन जमा न कराने वालों के खिलाफ आरसी (वसूली प्रमाणपत्र) जारी की जाएगी। हालांकि किसान मोहन सिंह माहरा की शिकायत की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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- राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
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