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आमदनी तो नहीं हुई, फूंक दिए 8 लाख

Fri, 02 Oct 2015 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान को एक साल पूरा हो गया है। गंदगी को कम करने में फिलहाल अभियान की गति ढीलीढाली है, मगर यहां सफाई और पॉलीथिन-प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग के लिए लगाई गई कांपैक्टर मशीन सफेद हाथी जरूर बन गई है। इस पर 8 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन 15 महीनों में अब तक इसका उपयोग एक बार भी नहीं हुआ है, जबकि दावा इस मशीन से पालिका की आय होने का किया गया था।
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अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि कांपैक्टर मशीन शासन द्वारा ही खरीदी गई। चंपावत में जुलाई 2014 को कांपैक्टर मशीन लगाई गई पर इस मशीन का अब तक इस्तेमाल नहीं हो सका। कांपैक्टर मशीन का काम पॉलीथिन और प्लास्टिक की बोतलों को कांपैक्ट कर छोटा रूप देना है। जिला मुख्यालय में कूड़े के रूप में महीने में करीब 2 क्विंटल पॉलीथिन एकत्र होती है।

मशीन में एक बार में 40 टन पॉलीथिन को रिसाइकिल कर 4 टन पॉलीथिन में तब्दील करने की क्षमता है, इससे किसानों को जैविक खाद भी मिलनी थी। इस पॉलीथिन को काठगोदाम में बनाए गए नगर विकास विभाग के प्लांट में बिक्री के लिए भेजा जाना था।
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एडीबी ने क्यों लगा दी मशीन
कांपैक्टर मशीन एशियन विकास बैंक द्वारा लगाया गया था। इसे लगाने से पहले मंत्रणा तो दूर पालिका से बात तक नहीं की गई। आखिर एडीबी ने यहां मशीन क्यों और कैसे लगा दी? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पालिका का कहना है कि पिछले साल 2 अक्तूबर से पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब कांपैक्टर मशीन में सिर्फ प्लास्टिक बोतल को ही कांपैक्ट किया जा सकेगा, लेकिन प्लास्टिक बोतलों की शहर में बेहद कम खपत होने से मशीन के इस्तेमाल पर दिक्कत आएगी।

कांपैक्टर मशीन में गत्ते और प्लास्टिक बोतलों को कांपैक्ट किया जाएगा, लेकिन इसे इकट्ठा करने के लिए भी कर्मचारी नहीं है। स्टाफ की कमी कांपैक्टर के उपयोग पर ब्रेकर बन रही है। कर्मियों की तैनाती के लिए कई बार सरकार से आग्रह किया गया, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला।
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-प्रकाश तिवारी, अध्यक्ष नगर पालिका।
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