जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। बीते एक दशक में इसकी व्यापकता दर में पांच गुना कमी आई है। इस वक्त जिले के पर्वतीय क्षेत्र में कुष्ठ रोग का पूरी तरह से उन्मूलन हो गया है, जबकि मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में कुष्ठ के सिर्फ चार ही रोगी है, जिसमें टनकपुर में तीन और एक बनबसा में है। टनकपुर के तीनों कुष्ठ रोगी बाहरी क्षेत्रों से आए हुए हैं।
जिला कुष्ठ रोग निवारण अधिकारी डा.आरके जोशी के मुताबिक जहां देश में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर दस हजार की आबादी पर एक मरीज की है। वहीं, चंपावत जिले में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर .10 फीसदी से भी कम है, जबकि वर्ष 1997 में चंपावत जिले के गठन के समय ये दर 3.4 फीसदी थी। कुष्ठ रोग में दाग में सुन्नता रोग की पहली पहचान है। डा.जोशी के मुताबिक प्रारंभिक लक्षण पाए जाने पर जांच और इलाज आवश्यक है।
सिर्फ सरकारी अस्पतालों में मिलती है एमडीटी
कुष्ठ रोग के इलाज की दवा एमडीटी सिर्फ सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती है। कुष्ठ रोग का इलाज चरणबद्ध तरीके से किया जाता है। रोगी का इलाज डॉक्टर की मौजूदगी में होता है। सभी अस्पतालों में एमडीटी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है तथा एएनएम एवं आशा वर्कर्स के माध्यम से कुष्ठ रोगियों के संबंध में समय-समय पर सर्वेक्षण किया जाता है।
स्ट्रांग फार्म में रहते हैं कुष्ठ रोगी
जिले के बनबसा में स्थित स्ट्रांग फार्म में कुष्ठ रोगियों के रहने की व्यवस्था की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर रोगियों का परीक्षण कर विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। सभी रोगियों के बीपीएल कार्ड बनाने के साथ ही उन्हें समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया है।