चंपावत मलीहाटे रामलील में लाग्या तमाम किस्में बिजली।
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मलीहाटे रामलील हन 128 साल पूर हे ग्यान हो महाराज। इन 128 साल में यांकि रामलीले ले कति निक भलो देख रा। कभ्भे राके उजाल में हुन्य यांकि रामलील आब बिजली क उज्याल में खेली जानने हो महाराज। अच्याल त रामलील में लाउडस्पीकर लगुन लाग ग्यान, पेली कलाकारों की अवाज ऐती जोरदार हुच्छी कि माइके की जरूरते ना पड़ छी।
रामलील में कज्यो सालों बठे जुडय़ा सुरेश साजी, भुवन पचौलीज्यू, दीपक तड़ागीज्यू, अशोक वर्माज्यू कुनान कि पेली बेर यांकि रामलील 1889 में किल्ले भिड़ थे राके उजाल में खेली गैछी। साठ साल हे लग ज्यादे टेम तक राके उजाल में यांकि रामलील भेछी। 1952 में मट्टी तेल मिलने बाद यांकि रामलील गैस उजाल में शुरू भे छी। उ टेम में तसीलदार साप परमिट दी बेर मट्टी तेल दिच्छया। सुरेंद्र तड़ागीज्यू, ईश्वरी दत्त पचौलीज्यू, पनीरामज्यू, गोपाल प्रहरीज्यू, प्रहलाद रामज्यू रोज गैस जलुन्य भय। रामलील हे अलावा बाट घाटा में लग 60-65 गैस रोजे जलन्य भय।
1965 तक गैस के उजाल में रामलील भेछी। गौड़ी पावर हाउस बनने बाद 1966 बठे बिजली क उजाल में रामलील हुनी शुरू भेछी। बिजली ऊने बाद रामलील और लगे बडिय़ के हुन पड़ छी। रामलील में लाउडस्पीकर लगुन पड़ गोछय। उ टेम में कलाकारों आवाज ऐती जोरदार हुच्छी कि लाउडस्पीकरे जरूरते ना पड़ छी।
आब तमाम किस्मे लाइट लगून पड़ ग्यान
चंपावत। बिजली क उजाल में रामलील और लग बडिय़ लागन पड़ी गे। अच्यालो रामलील में तमाम किस्मे बिजली लगुन पड़ग्यान। मलीहाटे रामलील में कज्यो सालो बठे बिजली लगुन्य पुष्कर रायज्यू और पृथ्वीराज सिंह तड़ागीज्यू बतुनान कि अच्यालो रामलील में डिमर लाइट, सर्च लाइट, हेलोजन और सीएफएल लाइट लागछीन। लाउडस्पीकरे अलावा कॉलर माइक लग लगूून पड़ ग्यान।