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Champawat News: मोबाइल की रोशनी में घायल को डोली में छह किमी दूर सड़क तक पहुंचाया

Sun, 09 Nov 2025 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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बकोड़ा गांव के घायल को रात में डोली से लाते ग्रामीण। संवाद
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मंच/चंपावत। सीमांत ग्राम पंचायत मंच के मटकांडा गांव और बकोड़ा के दो ग्रामीण घर जाते बीती देर शाम 100 मीटर गहरी खाई में गिर गए। रात में संघर्षों के बाद ग्रामीणों ने घायलों को खाई निकाला। इसमें एक गंभीर घायल को खाई निकालकर डोली की मदद से मंच पहुंचाया और वहां से एंबुलेंस की मदद से इलाज के लिए चंपावत अस्पताल ले गए।
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शनिवार देर शाम करीब सात बजे ग्राम पंचायत बकोड़ा निवासी चंचल सिंह (48), मटकांडा के जगत सिंह (50) और उनका पुत्र अर्जुन सिंह मंच से घर की तरफ पैदल जा रहे थे। मरथपला गांव के पास अचानक चंचल सिंह का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गए। उन्हें बचाने की कोशिश में उनके साथी जगत सिंह भी खाई में गिर गए। पीछे से चल रहे जगत सिंह के पुत्र अर्जुन ने दोनों को गिरते देखा और भागकर मरथपला गांव के लोगों को जानकारी दी। इसके बाद गांव के धीरज सिंह और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
ग्राम पंचायत मंच से भी युवाओं को मदद के लिए बुलाया गया। मौके पर ग्रामीणों ने टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में खोजबीन शुरू की। पहले चंचल सिंह दिखाई दिए, उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई थी जबकि जगत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। ऐसे में ग्रामीणों ने डंडों की मदद से चादर में लपेट कर जुगाड़ की डोली बनाई। घायल जगत सिंह को मोबाइल की रोशनी में करीब ढाई घंटे पैदल चलकर छह किमी मंच तक लाया गया। मंच चौकी इंचार्ज मनोहर सिंह ने भी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर घायल को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
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इसके बाद 108 एंबुलेंस वाहन की मदद से रात 10:30 बजे घायल जगत सिंह को चंपावत अस्पताल के लिए भेजा गया। डोली में मरीज को लाने वालों में जगत सिंह के पुत्र अर्जुन सिंह, धीरज सिंह, गंगा सिंह, कृष्ण सिंह, विनोद सिंह, दीपक सिंह, अनिल सिंह, नंद सिंह, मनोज सिंह, राजेंद्र सिंह, संजय सिंह, सुंदर सिंह, राहुल महर आदि युवाओं ने सहयोग दिया। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार है।
100 से अधिक लोगों को डोली लाया जा चुका
सीमांत तल्ला देश के सड़क विहीन अब तक 100 से अधिक लोगों को डोली लाया जा चुका है। उत्तराखंड अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है लेकिन यह घटना इस सच्चाई को उजागर कर रही है कि सड़क विहीन गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खाली होते जा रहे हैं। नेता और मंत्री हवाई सेवाओं से सफर कर रहे हैं, लेकिन सीमांत के गांव मटकांडा, बकोड़ा और मरथपला के लोग आज भी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। मरीजों को डोली पर ढोना पड़ रहा है। मंच-बकोड़ा सड़क का सर्वे पूरा हो चुका है लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन यहां पोकलेन मशीन चलेगी उस दिन कहेंगे कि हमारे अच्छे दिन आ गए हैं।
लोगों का कहना
मरथपला से मंच की दूरी छह किमी है और मंच से मुख्यालय 32 किमी दूर पड़ता है। पैदल चलने में ढाई घंटे का समय लग जाता है। एक घंटे का सफर वाहन से करना पड़ता है। गांव सड़क से जुड़ता तो बड़ी राहत मिलती। - गंगा सिंह, निवासी मटकांडा

घायल को डोली से ले जाना भी आसान नहीं था। एक तो दर्द में थे तेज चलने में डोली हिल रही थी। गांव तक सड़क पहुंचती तो ग्रामीणों के दिन भी सुधर जाते। सरकार को हमारी समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है। - विनोद सिंह, निवासी बकोड़ा
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