चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए खतरा बने 11 पेड़ों को काटने की आड़ में तीन अतिरिक्त पेड़ काटने के मामले में वन विभाग करीब छह माह बाद तक कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। उल्टा अब तीन पेड़ों के 19 गिल्टे गायब होने के आरोप लग रहे हैं। वहीं वन पंचायत के इस गड़बड़झाले को लेकर ग्रामीण कई बार वन विभाग से गुहार लगा चुके हैं।
वन पंचायत पुनेठी में एनएच के लिए खतरा बने 11 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पंचायत ने 11 के स्थान पर 14 पेड़ काट डाले। रेंजर केआर टम्टा ने बताया कि एक ग्रामीण की शिकायत पर पिछले साल अगस्त के शुरू में वन विभाग ने छापा मार कर अनधिकृत रूप से काटे गए देवदार के तीन हरे पेड़ों के 19 गिल्टे बरामद किए थे। दो ग्रामीणों ने पेड़ काटने का जुर्म भी कबूल लिया था। साथ ही दोनों आरोपियों पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं मामले का निस्तारण हुए बगैर गिल्टे गायब होने का ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में विभाग की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर जांच की मांग की है।
कोट
पुनेठी वन पंचायत में बरामद गिल्टों का पता लगाया जा रहा है। अवैध लकड़ी की नीलामी अभी नहीं की जा सकी है। लकड़ी के निस्तारण के लिए सरपंच ने वन विभाग को प्रस्ताव नहीं दिया है। प्रस्ताव मिलते ही निस्तारण की कार्यवाही की जाएगी।
- केआर टम्टा, रेंजर, चंपावत।