बनलेख-स्वाला के बीच खाई की तरफ मलबा फेंकती जेसीबी
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बारहमासी सड़क निर्माण कार्य में ठेकेदार कंपनियों की मनमानी थम नहीं रही है। सड़क बनने के बाद की सुविधाओं के सब्जबाग दिखाकर कार्यदायी विभाग एवं ठेकेदार कंपनियां बेखौफ मानकों को ताख पर रखकर निर्माण कार्य कर रही हैं। इससे अब प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। शिकायतों पर कार्रवाई और फिर छूट दे रहा प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। सड़क कटिंग का मलबा सड़क से नीचे फेंक कर जहां ठेकेदार कंपनियां वन संपदा को नुकसान पहुंचा रही हैं, वहीं अब सड़क निर्माण के नाम पर मानकों को ताख पर रखकर मोबाइल स्टोन क्रशर स्थापित करने का खेल भी चल पड़ा है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राजमार्ग के बारहमासी सड़क बनने के बाद हालांकि बेहतर सड़क सुविधा के साथ ही सीमांत से लगे इस क्षेत्र के विकास में तेजी तो आएगी, लेकिन निर्माण में मानकों की अनदेखी से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है। ऐसा नहीं है कि बारहमासी सड़क निर्माण के लिए बनाई गई योजना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में नहीं रखा गया है, लेकिन निर्माण की शर्तों का खुला उल्लंघन हो रहा है। शर्तों के मुताबिक सड़क के लिए पहाड़ी काटने से पहले सड़क किनारे वारयक्रेट बनाकर डंपिंग यार्ड बनाए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। अब भी सड़क कटिंग का मलबा धड़ल्ले से खाई की तरफ फेंककर वन संपदा को क्षति पहुंचाई जा रही है।
वहीं, जिला प्रशासन एवं वन महकमा कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करने में जुटा है। पिछले दिनों दौरे पर आई जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्य ने तो यहां तक कह डाला कि उनकी सरकार की प्राथमिकता विकास है और इसमें यदि वन संपदा को क्षति पहुंचती भी है तो कोई नुकसान नहीं है। ऐसे में शासन-प्रशासन से पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस अनदेखी से ठेकेदार कंपनियों के हौसले बुलंद हैं।
बता दें कि पिछले दिनों जन शिकायत पर हरकत में आए प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी के कार्य पर रोक लगा दी थी। रोक डंपिंग यार्ड नहीं बनाए जाने पर लगाई थी, लेकिन फिर भी कंपनी निर्माण कार्य में डटी रही। अब भी बेखौफ पहाड़ काटकर मलबा सड़क से नीचे फेंका जा रहा है। इतना ही नहीं अब मोबाइल स्टोन क्रशर लगाने में भी मानकों को ताख पर रखा जा रहा है। शासनादेश के मुताबिक मोबाइल क्रशर निर्माण स्थल से बाहर नहीं लगाया जा सकता है। शासनादेश के अनुसार मानकों में सरलीकरण की संस्तुति समिति नहीं करेगी, लेकिन अमोड़ी में मानकों के वितरित बारहमासी सड़क से करीब डेढ़ किमी दूर अमोड़ी-छतकोट मार्ग पर मोबाइल क्रशर लगाने की अनुमति दी गई है।
कार्यदायी विभाग पर लगाया गया है जुर्माना
सड़क निर्माण में वन संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। डंपिंग यार्ड बने हैं, लेकिन फिर भी मलबा खाई की तरफ फेंकने की शिकायत मिल रही है। इसके लिए कार्यदायी विभाग के खिलाफ कार्रवाई कर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
-केएस बिष्ट, डीएफओ चंपावत वन प्रभाग।