चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी सड़क नवंबर 2019 में पूरी होनी थी, लेकिन इसके 19 माह बाद भी काम अभी अधूरा है। काम पूरा नहीं होने का नतीजा यह कि मानसून शुरू होने से पहले ही ये सड़क मई से सात बार बंद हो चुकी है। बरसात के मद्देनजर इस मार्ग पर 30 जगह खतरनाक बनी है। इससे आवाजाही में ही अवरोध नहीं हो रहा है, बल्कि हादसों की भी आशंका है। तीन दिन में दो स्थानों (स्वांला और झालाकुड़ी) पर दो वाहन बोल्डर या मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचे हैं।
1556 करोड़ रुपये से बन रही 136 किमी लंबी बारहमासी सड़क में चार पैकेज के तहत नवंबर 2017 से शुरू काम को नवंबर 2019 में पूरा होना था। काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ, तो इसे बढ़ाकर मार्च 2020 किया गया। फिर ये सिलसिला दिसंबर 2020, फरवरी 2021 और मई 2021 तक जा पहुंचा। फिर भी काम अधूरा रहा, तो अब इसे पूरा करने के लिए सितंबर 2021 तक का आग्रह किया गया है।
सड़क की चौड़ाई बढ़ाने से लेकर डामर का अधिकांश काम पूरा कर लिया गया है। हालांकि नाली, सुरक्षा कार्य और चल्थी में पुल निर्माण सहित कुछ छुटपुट काम होने बाकी है। काम करा रही कंपनियों का कहना है कि बरसात में आपदा के साथ ही कोरोना के कारण काम में देरी हुई। एनएच खंड के ईई एलडी मथेला का कहना है कि बारहमासी सड़क का काम मई में पूरा होना था, लेकिन कंपनियों ने कोरोना और अन्य कारणों से समयावधि बढ़ाने का आग्रह कर सितंबर 2021 तक की मोहलत मांगी है। समय सीमा बढ़ाने का पत्र सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय को भेजा जा रहा है।
बारहमासी सड़क के पैकेज
1. टनकपुर-बेलखेत (40 किमी)
2. बेलखेत-चंपावत (38 किमी)
3. चंपावत-च्यूरानी (27 किमी)
4. च्यूरानी-पिथौरागढ़ (31 किमी)
सड़क बंद होने से इस साल चार सप्ताह में बाधित आवागमन
20 मई : भारतोली के पास पहाड़ी गिरने से एनएच 70 घंटे तक बंद रहा।
25 मई : मोकोट और भारतोली के पास भारी मलबा आने से 24 घंटे से बाद 26 मई को खुली सड़क।
4 जून : टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह घंटे आवाजाही ठप।
10 जून : टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग छह घंटे बंद।
12 जून : भारतोली के पास मलबे से साढ़े पांच घंटे बंद रहा राष्ट्रीय राजमार्ग।
17 जून : भारतोली के पास सड़क धंसने से दिनभर बंद रहा राजमार्ग।
कोट
प्रशासन की पहली प्राथमिकता जन क्षति न हो, इसे सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही अति संवेदनशील जगहों पर 30 जेसीबी, पोकलैंड और अन्य मशीनें रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।