चंपावत। हिंदी साहित्य भारती की ओर से हिंदी सप्ताह के तहत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रभा पंत की अध्यक्षता और प्रदेश महामंत्री डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री के संचालन में हुई इस गोष्ठी में विभिन्न स्थानों से आए कवियों ने काव्य पाठ किया।
गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए साहित्य भारती के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ.रवींद्र शुक्ल ने कहा-मातृभूमि का चारण हूं मैं, कवि का धर्म निभाता हूं अमर शहीदों की गाथा से सोए सिंह जगाता हूं। इसके बाद डॉ. प्रभा पंत ने अपनी रचना ‘हिंदी हूं मैं, हिंदी हूं मैं, भारत मां के माथे की बिंदी हूं मैं’ रचना प्रस्तुत की। डॉ. अनिल शर्मा ने ‘एक सूत्र में ये बांधे सारे देश को, धन्य करे जन-जन को प्यारी हिंदी’ रचना सुनाई। काव्य गोष्ठी में ठाकुर मोहित सिंह, डॉ. बसंती मठपाल, डॉ. अर्पणा रावत, राजेश जोशी, साधना जोशी, जितेंद्र राय, अरुण शर्मा, अलका शर्मा, नीरज पंत, डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, मोहन चंद्र जोशी, विभा तिवारी, आनंदी नौटियाल, अशोक शर्मा, दीपा पांडेय, डॉ. जितेंद्र तिवारी, नीलम शर्मा, डॉ.कीर्ति बल्लभ सक्टा आदि ने काव्यपाठ किया।
केवि क्रमांक दो में हिंदी पखवाड़ा शुरू
बनबसा (चंपावत)। केवि क्रमांक दो में हिंदी पखवाड़ा शुरू हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या रंजना बरफाल ने किया। बताया कि इस पखवाड़े का समापन 28 सितंबर को किया जाएगा। इस दौरान हिंदी साहित्य पेंटिंग, शब्द लेखन, सुलेख, वाचन, नारा लेखन, फ्लेक्सी बनाना, स्वरचित काव्यपाठ, पत्र लेखन, कथा वाचन, हिंदी कार्यशाला का आयोजन होगा। पखवाड़े के संयोजक हिंदी प्रवक्ता श्याम लाल होंगे। कार्यक्रम में कक्षा एक से बारहवीं तक के विद्यार्थी प्रतिभाग कर सकेंगे। उधर राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्या डॉ. आभा शर्मा के नेतृत्व में हिंदी दिवस सादगी से मनाया गया। डॉ. आरएन पांडेय ने हिंदी दिवस के महत्व पर व्याख्यान दिया। हिंदी के सहायक प्राध्यापक डॉ. हेम कुमार गहतोड़ी ने हिंदी भाषा के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। वहां डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. दिनेश कुमार आदि मौजूद थे। संवाद
इंजीनियरिंग कॉलेज में मनाया गया हिंदी दिवस
टनकपुर (चंपावत)। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज में हिंदी दिवस मनाया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अमित अग्रवाल ने हिंदी भाषा के विकास की जरूरत पर जोर दिया। इस मौके पर पंकज कुंवर, शैलजा जोशी, रेखा, तनुजा, कौशब, मोहित, मनीष आदि मौजूद थे। संवाद