नेपाल सीमा से लगे खर्राटका के जंगल में वन्यजीव शिकारियों की तलाश में कांबिंग पर पुलिस, पीएसी, एसओटीएफ, वन विभाग की संयुक्त टीम दो कांबिंग कर लौट आई है। 50 किमी जंगल में की गई कांबिंग में खर्राटाक गांव के आसपास शिकारियों के डेरा जमाकर वन्यजीवों के शिकार के प्रमाण तो दिखे, लेकिन न तो शिकारी और न ही उनके बारे में कोई जानकारी मिली।
चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज का खर्राटाक जंगल नेपाल सीमा से सटा है। सर्दियों में शारदा का जल स्तर घटने के बाद हर साल नेपाल के शिकारी हवा भरे वाहनों के ट्यूबों से शारदा को पार कर खर्राटाक के जंगल में आकर वन्यजीवों का शिकार करते हैं। इस बार भी हाल में शिकारियों के डेरा जमाने के प्रमाण मिलने के बाद अमर उजाला ने इस खबर प्रमुखता से प्रकाशित की तो सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हुईं।
एसपी रामचंद्र राजगुरु के निर्देश पर पुलिस, पीएसी, वन विभाग, एसओटीएफ, खुफिया एजेंसी की 20 सदस्यीय टीम गठित कर शिकारियों की तलाश में कांबिंग के लिए खर्राटाक के जंगल भेजी गई। दो दिन तक कांबिंग कर सोमवार को टीम लौट आई है। टीम के मुखिया एसओटीएफ प्रभारी भाष्कर बडोला ने बताया कि टीम ने सूखीढांग, कलखुनिया, पोथ, कोटकेंद्री, खर्राटाक, चूका, खलढुंगा का करीब 50 किमी जंगल छाना, लेकिन शिकारी नहीं मिले।
खर्राटाक गांव के आसपास के जंगल में शिकारियों के मचान, वन्यजीवों के शिकार के प्रमाण जरूरी मिले। उन्होंने बताया कि पलायन से पुजारियों के गांव खर्राटाक में मकान वीरान हैं। इसी फायदा नेपाल के शिकारी उठा रहे हैं। कांबिंग टीम में एसआई मोहन भट्ट, कांस्टेबल कमल पाटनी, वन दरोगा रविंद्र लाल, वन रक्षक रेवाधर जोशी, बद्री दत्त जोशी, नागेंद्र नाथ, भुवन पंत, एलआईयू कांस्टेबल मनोज, पीएसी के नायक दिनेश सिंह रौंकली, कांस्टेबल कमला प्रसाद समेत चार अन्य कांस्टेबल शामिल थे।