धुरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में आठवीं तक तो सभी बच्चे आसानी से पास होते हैं, लेकिन इसके बाद नौंवी से आगे बढ़ने के लिए उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वजह विज्ञान के शिक्षक नहीं होने से यहां के छात्र-छात्राओं का शैक्षिक स्तर गिर रहा है। आठवीं पास कर दूसरे स्कूल में दाखिला लेने वाले यहां के छात्रों को आगे की कक्षाओं में पास होने में परेशानी हो रही है।
ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी की बेटी रेखा इसी स्कूल की छात्रा रही हैं। नौंवी में रेखा ने सूखीढांग जीआईसी में दाखिला लिया, लेकिन वह दो साल में भी इस कक्षा से आगे नहीं बढ़ सकी। थकहार कर परिजनों ने उसे मुक्त विश्वविद्यालय के जरिए आगे की पढ़ाई कराई। ऐसा वाकया एक नहीं, अधिकांश छात्र-छात्राओं के साथ है। अभिभावकों का कहना है कि यहां हर साल 6 से 10 छात्र हाईस्कूल में जाते हैं, लेकिन पास होने वालों की तादात बमुश्किल तीन रहती है। ऐसे नतीजों के लिए छात्र कम एवं स्कूल की दुर्दशा ज्यादा जिम्मेदार है। धुरा में चार शिक्षकों के सापेक्ष दो ही काम कर रहे हैं। यहां के विज्ञान शिक्षक करीब एक दशक से दूसरी जगह संबद्ध हैं।
धुरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान के शिक्षक जगदीश चंद्र पाठक मध्यान्ह भोजन योजना के प्रभारी के रूप में काम कर रहे हैं। एमडीएम महत्वपूर्ण योजना है। नए एमडीएम प्रभारी की तैनाती होने पर उन्हें मूल विद्यालय में भेज दिया जाएगा। -अंशुल बिष्ट, उप शिक्षाधिकारी, चंपावत।
आज डीएम से मिलेंगे ग्रामीण
धुरा स्कूल में शिक्षकों की कमी नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, बीडीसी सदस्य राजेंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता स्वरूप राम आदि का कहना है कि इस मसले को लेकर बुधवार को डीएम कार्यालय में दस्तक देंगे।