चंपावत। नगर पंचायत को अपग्रेड कर 2013 में नगर पालिका बनने पर लोगों में खुशी थी। मगर ये अपग्रेडेशन अब लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। नगर पालिका ने भवन स्वामियों को भवन कर (हाउस टैक्स) की बड़ी रकम के बिल भेज दिए हैं जबकि अभी भवन स्वामियों की आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो सका है। इससे लोगों में नाराजगी है। वे इसका विरोध कर रहे हैं।
चंपावत में 2120 मकान हैं। इन सभी पर भवन कर लगाया गया है। इन पर करीब 450 रुपये से चार हजार रुपये तक का कर निर्धारित किया गया है। 2014-15 में भवन कर से पालिका को 1.16 लाख रुपये का राजस्व मिला था। पहले यहां केवल उन मकानों में भवन कर लगता था, जो किराए में लगे होते थे। दो साल पहले बोर्ड ने भवन कर निर्धारण का तरीका बदलने का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद सभी मकानों पर क्षेत्रफल के आधार पर भवन कर लगाने का निर्णय लिया गया। मगर मोहन सिंह, प्रेमबल्लभ सहित कई नागरिकों का कहना है कि भवन कर लगाए जाने के लिए सर्वे ठीक से नहीं हुआ है। भवन कर लगाने के बाद आपत्तियों को दर्ज कराने का वक्त तक नहीं मिल सका। नागरिकों ने भवन कर की धनराशि को मनमाना बताते हुए विरोध किया है।
चंपावत। कई ऐसे भवन स्वामियों को भी भवन कर के बिल भेज दिए गए हैं, जिनके भवन पूरे नहीं बन सके हैं। मलिन बस्ती आवास योजना के तहत चंपावत में 73 भवन बनाए जाने हैं, लेकिन इसमें से अधिकतर मकान अभी अधूरे हैं। मुन्ना लाल, रोशन लाल, दिनेश लाल, अमरनाथ, गोपाल राम, विनोद लाल, जीवन लाल, जगदीश प्रसाद आदि का कहना है कि उन्हें 450 रुपये का भवन कर का बिल मिला है।