फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये अस्पताल है या सिरदर्द

Sat, 14 Nov 2015 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित करने के बावजूद रोगियों को इलाज के लिए बाहर जाना ही पड़ रहा है। सरकार ने यहां बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के लिए बरेली के शील अस्पताल से अनुबंध किया था। अनुबंध में यहां हर वक्त 12 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती करने का विशेष उल्लेख किया गया है। 25 अक्तूबर 2013 से अस्पताल का प्रबंधन शील ने शुरू किया। तब से अब तक यहां कभी भी आठ से अधिक डॉक्टर तैनात नहीं रहे।
विज्ञापन


14 नवंबर को अस्पताल में प्रसूति रोग, ईएनटी एवं दंत चिकित्सक ही मौजूद थे। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण यहां रोगियों की संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले वर्ष जहां 30 हजार रोगी कम आए। वहीं, इस वर्ष यह संख्या और कम होने की उम्मीद है। पीपीपी मोड से पहले अस्पताल में प्रतिवर्ष 80 हजार से अधिक ओपीडी हुआ करती थी। शील प्रबंधन अब इस संख्या को बढ़ाने के लिए मरीजों के प्रत्येक रोग का अलग-अलग परीक्षण करवा रहा है, जबकि पहले एक पर्ची में सभी रोगों की जांच हुआ करती थी।

वर्टिकल एनालाइजर और जनरेटर हुआ गायब
सम विकास योजना से क्रय की गई सीआर्म मशीन की कोई उपयोगिता यहां नहीं है। यह मशीन दून अस्पताल के बाद केवल लोहाघाट अस्पताल में उपलब्ध है। ओटी में काम आने वाली एक लाख रुपये की वर्टिकल एनालाइजर मशीन का कोई अता-पता नहीं है। यही नहीं यहां से जनरेटर भी गायब हो गया है।
विज्ञापन


सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए है अल्ट्रासाउंड सुविधा
अस्पताल में दवा होते हुए भी मरीज को बाहर से दवाएं लाने के लिए मजबूर किया जाता है। इस पर कई बार सीएमओ स्तर से रोक लगाई गई, लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा है। प्रति प्रसव प्रबंधन सरकार से 1800 रुपये लेता है, लेकिन सुविधा के नाम पर महिलाओं को कुछ भी नहीं देता है। काफी हो-हल्ले के बाद गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है, जबकि यह सुविधा आम लोगों के लिए नहीं है।

प्रबंधन के खिलाफ हो चुके हैं कई आंदोलन
अस्पताल में 10 बजे से पहले कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आते हैं, जिस कारण रोगियों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। अव्यवस्था के चलते अकाल मौतें भी हो चुकी हैं। प्रबंधन के खिलाफ कई बार आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन इनका भी कोई असर नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें