मरीज को ह्वील चेयर पर सीढि़यों के रास्ते नीचे ले जाते तीमारदार। फोटो स्रोत: खीमराज जोशी
पिथौरागढ़। बेस अस्पताल की लिफ्ट तकनीकी कारणों से खराब पड़ी है। डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों को ह्वील चेयर पर सीढि़यों के रास्ते लाना ले जाना पड़ रहा है। इससे मरीज और तीमारदार दोनों परेशान हैं।
पिथौरागढ़ बेस अस्पताल में हंस फाउंडेशन की डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई है। अस्पताल के जिस भवन में डायलिसिस यूनिट लगी है उसमें ऊपरी मंजिलों में जाने के लिए रैंप नहीं है केवल सीढि़यां बनी हैं। इसके अलावा लिफ्ट की सुविधा भी है। तकनीकी कारणों से पिछले कुछ समय से लिफ्ट काम नहीं कर रही है। वर्तमान में लगभग 45 से अधिक मरीजों का सप्ताह में दो बार डायलिसिस होता है। कई मरीज बेहद कमजोर हैं और सीढि़यों में चढ़ उतर नहीं सकते हैं।
लिफ्ट की खराबी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ किडनी के मरीजों को ह्वील चेयर पर बिठाकर सीढि़यों से लाना ले जाना पड़ रहा है। इसके चलते तीमारदार भी परेशान हैं। अकेले तीमारदार के लिए मरीज को सीढि़यों से ह्वील चेयर में बिठाकर लाना ले जाना संभव नहीं है। ऐसे में अन्य मरीजों के साथ आए तीमारदारों या फिर अस्पताल स्टाफ की मदद लेनी पड़ रही है।
मूनाकोट के पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख खीमराज जोशी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि लिफ्ट खराब पड़ी है। यदि कभी संचालन हुआ तो बिजली जाने के बाद दोबारा लिफ्ट संचालित नहीं होती है। उन्होंने मरीजों की समस्या को देखते हुए लिफ्ट में आई तकनीकी गड़बड़ी को शीघ्र दूर किए जाने की मांग की है।
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बेस अस्पताल के पूर्व में बने भवनों में रेनोवेशन का कार्य किया जा रहा है। भवनों के सुधार के साथ रैंप का निर्माण भी किया जाना है। मरीजों को असुविधा न हो इसके लिए लिफ्ट में आई तकनीकी गड़बड़ी को शीघ्र दूर कर लिया जाएगा। - डॉ.अजय आर्य, प्राचार्य मेडिकल कालेज पिथौरागढ़।