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अस्पताल 23 लेकिन अल्ट्रासाउंड की सुविधा सिर्फ एक में

Thu, 06 Apr 2017 10:56 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
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चंपावत अस्पताल के आवासीय परिसर में खड़ा सचल चिकित्सा वाहन। - फोटो : अमर उजाला
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चंपावत जिले के सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे जैसी बेसिक सुविधाएं राज्य बनने के 17 साल बाद भी नहीं  मिल पाई हैं। चंपावत, टनकपुर के बाद जिले के तीसरे सबसे बड़े अस्पताल लोहाघाट में तो एक्सरे तक की सुविधा मरीजों के लिए नहीं है। तीन चलते-फिरते अस्पतालों के पहिए भी लंबे समय से जाम हैं। जिले के लोग मामूली इलाज, पैथोलॉजी जांच और अन्य परीक्षण के लिए हर महीने लाखों रुपये निजी केंद्रों में देने को मजबूर हो रहे हैं।
 छोटे-बड़े 23 सरकारी अस्पताल वाले चंपावत जिले के तीन स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड की मशीन होने के बावजूद परीक्षण की सुविधा एकमात्र जिला अस्पताल में है। टनकपुर और लोहाघाट सीएचसी में अल्ट्रासाउंड परीक्षण न होने से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य लोगों को निजी केंद्रों में धन खर्च करना पड़ रहा है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से दोनों अस्पतालों में परीक्षण नहीं हो रहा है। लोहाघाट अस्पताल में एक्सरे तकनीशियन नहीं होने से मरीजों को एक्सरे के लिए भी प्राइवेट केंद्रों में दौड़ लगानी पड़ रही है।
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हालत इतने गंभीर हैं कि तीन सचल चिकित्सा सेवा में से एक भी काम नहीं कर रही है। जिले में 2009-10 से आरोग्य रथ और जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा के जरिए सड़क से लगे ग्रामीण इलाकों में कैंप लगाने की सुविधा शुरू हुई थी। इन कैंपों में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच की सुविधाओं के अलावा मरीजों को निशुल्क दवाएं भी दी जा रही थी। लेकिन 2016 से ये सेवाएं भी ठप है। इससे भी बुरा हाल 2006 में 31.50 लाख रुपए की लागत से खरीदी गई चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) का है। छह वर्षों से यह वैन अस्पताल के आवासीय परिसर में खड़ी है। एनएचएम की नोडल अधिकारी डॉ. रश्मि पंत का कहना है कि बजट स्वीकृत न होने से यह सेवाएं ठप हैं। लोगों का कहना है कि अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय सुविधाएं बढ़ाई जाएं ताकि लोग प्राइवेट अस्पतालों में जेब कटवाने को मजबूर न हों।
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इन आठ अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं
तामली व भिंगराड़ा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
देवीधुरा, टांण, सिप्टी, बनबसा, धौन और चल्थी राजकीय एलोपैथिक केंद्र।

कोट
डॉक्टरों और तकनीशियनों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है। जिले में 94 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 46 डॉक्टर हैं। डॉक्टरों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है।
डॉ. डीएल शाह, सीएमओ, चंपावत।
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