टनकपुर (चंपावत)। सामरिक महत्व के साथ सीमांत क्षेत्र के विकास की नई उम्मीद काली नदी के किनारे टनकपुर-जौलजीबी मार्ग के निर्माण के लिए प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र के पेंच से बाहर निकलने की संभावना बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था के अनुसार अब भारत सरकार के संयुक्त सचिव का निरीक्षण प्रस्तावित है।
बता दें कि जब वर्ष 2011 में टनकपुर से जौलजीबी तक काली नदी के किनारे सर्वे में दूरी महज 135 किमी की बात सामने आई तो लोगों को भविष्य में महज कुछ घंटों में हिमालय छू लेने का सपना जल्द साकार होने की उम्मीद जगी थी। सड़क के लिए वर्ष 2016 में 200 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए लेकिन पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र के पेंच से मामला अटक गया। सामरिक महत्व के इस मार्ग पर चंपावत जिले में पहले चरण में टनकपुर से रूपालीगाड़ तक 55 किमी में सड़क निर्माण का कार्य आरंभ हुआ।
रूपालीगाड़ से आगे जौलजीबी तक के हिस्से में दूसरे सिरे से बलतड़ी तक सिंगल सड़क बनी है जबकि बलतड़ी से रूपालीगाड़ तक करीब 47 किमी हिस्सा पंचेश्वर डाम के पेंच में फंसा है। एईई ने बताया कि ताजा मामले में 30 जनवरी को डीआईजी एसएसबी, सीडब्ल्यूसी, सीडब्लूसी और पीडब्ल्यूडी पीआईयू की संयुक्त टीम ने रूपालीगाड़ से आगे निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि सड़क से एसएसबी की चौकियां भी कनेक्ट होना प्रस्तावित है। जनवरी में भारत सरकार से पत्र आया था जिसके अनुपालन में पहला संयुक्त निरीक्षण हुआ। इसकी रिपोर्ट भेजने के बाद भारत सरकार से संयुक्त सचिव का निरीक्षण प्रस्तावित है। इसके बाद ही सड़क के शेष हिस्से के बारे में आगे की कार्यवाही होने की संभावना है। संवाद
चार पुलों का होना है निर्माण
लोनिवि के परियोजना क्रियान्वयन इकाई ठूलीगाड़ के एईई विजेंद्र सिंह पोखरिया ने बताया कि टनकपुर से 55 किमी रूपालीगाड़ तक चार पुलों को छोड़कर सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। इसमें लधिया चल्थी मेें 690 मीटर लंबे पुल के लिए 50.14 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए है। इसके अलावा किमी 46 में आमड़ा, किमी 48 में तरकुली, किमी 50 आमनी में 24-24 मीटर के तीन पुलों का निर्माण होना है। प्रत्येक पुल की लागत 1.86 करोड़ रुपये है। चारों पुलों के लिए डिजाइनिंग का कार्य भी चल रहा है।
इन गांवों को होगा लाभ
पुल बनने से सीमांत के चूका, सीम, खेत, दियूरी, तामली, आमना, तरकुली आदि क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी। इस सड़क से अनेक गांवों के लिए लिंक सड़कें भी प्रस्तावित हैं।