तहसील कार्यालय में तहसीलदार का कक्ष। समय 10.44 बजे, लेकिन तहसीलदार साहब अपने कार्यालय में मुखातिब नहीं हुए थे। अमर उजाला की टीम बुधवार सुबह 9.55 बजे से 10.45 बजे तक इस कार्यालय में रही तो ये नजारा देखा।
1872 में स्थापित चंपावत तहसील में तहसीलदार की कुर्सी खाली मिली। अलबत्ता सभी 6 कर्मचारी 10 बजे के तय समय पर कार्यालय में उपस्थित थे, लेकिन तहसील कार्यालय में भीड़भाड़ नदारद थी। तहसीलदार अरुण कुमार सिंह का कहना है कि कार्यालय में लोगों की लगातार आवाजाही होने से काम में बाधा पहुंचती है। इसलिए देर तक कमरे में ही जनगणना का काम निपटाया और दफ्तर आने में देरी हुई।
तहसील परिसर में 2013 स्थापित एसडीएम कार्यालय में भी एसडीएम की कुर्सी खाली थी। एसडीएम जेएस राठौर का एडीएम में पदोन्नति होने से यह कुर्सी रिक्त है। वहीं यहां तीन कर्मी मौजूद थे। एसडीएम के पेशकार संजय जोशी ने बताया कि एसडीएम कार्यालय से स्थायी, चरित्र, हैसियत, उत्तरजीवी प्रमाण पत्र जारी होते हैं, जबकि तहसीलदार कार्यालय से आय, जाति और पर्वतीय निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
इसी तरह तहसील परिसर पर स्थित जिला निबंधक कार्यालय खुला जरूर था, लेकिन वहां न कोई अधिकारी मौजूद था और नहीं कर्मचारी। इक्का-दुक्का लोग जमीन संबंधी काम के लिए जरूर पहुंचे थे। कोषागार कर्मियों की हड़ताल के चलते स्टांप नहीं मिलने से वे भी कुछ समय बाद लौट गए। उप जिला निबंधक का दायित्व इस वक्त तहसीलदार के पास है। तहसील में काम निपटा रहे अरायजनवीस जगदीश जोशी और कौशल साह ने बताया कि उप निबंधक का पद स्वीकृत जरूर है, लेकिन स्थापना के बाद से यहां स्थायी उप निबंधक की तैनाती नहीं हो सकी है।
एसडीएम के सभी काम मैं रोज निपटा रहा हूं। लोगों के काम नहीं रुक रहे हैं। जिलाधिकारी प्रशिक्षण में गए हैं। लौटने के बाद डीएम ही नए एसडीएम की तैनाती करेंगे। -जेएस राठौर, प्रभारी जिलाधिकारी, चंपावत।