चंपावत/लोहाघाट/पाटी। जिले भर में खड़ी होली का गायन चरम पर पहुंच गया है। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी होली पूरे यौवन पर पहुंच गई है। मौसम में तपन पैदा होने के साथ होली के रंग में लोग सराबोर होने लगे हैं।
होल्यारों की टोलियों ने पूर्णिमा के दिन तेरे नैन रसीले यार बालम प्रीति लगा ले नैनों से, जन बोले बलम मैं बिखर जाऊंगी, आटा गूंथन छोड़ आऊंगी, लगी लगी पीरत कैसे तोड़ी तुम बोलो क्यों न सुंदर गोरी, सलवा में झलक रहे दो नैना, दो नैना गोरी सलवा में झलक रहे दो नैना आदि होलियों का गायन किया।
लोहाघाट नगर में एलआईसी कार्यालय के पास महिला होल्यारों ने जमकर होली गाई। डैंसली में होल्यारों ने गीता ज्ञान बढ़ायो अर्जुन प्रेम जगायो गिरधर से, ऐसी चातुर नार श्रवण मारो छ, भीम से पड़ गई रार कीचक मारो छ आदि गीत गाए जा रहे हैं। रायनगर चौड़ी के देवालय में कैसे छोडूं धरम लागो अति प्यारो, बरसाने की गूंजरी गोपाला जी हो गीतों के साथ यहां श्रंगार रस पर भी होलियों का गायन किया जा रहा है।
सुंई के प्रसिद्ध शिव मंदिर प्रांगण में मुनि के संग बालक काहुन के, दशरथ नाम पिता उनके, सीता राम को ब्याहुन सखिया, चलो जनकपुर जाना है। रेगडू में भरतै दीजो राज केकई राम चले वन से वन को समेत श्रंगार रस पर आधारित दधि लूटो नंद के लाल प्यारे मोहनियां गीत पर भी होली का गायन किया जा रहा है।
बाराकोट के डोबाभागू गांव में जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी ने सभी होल्यारों को टीका लगाकर बधाई दी। वहां तेरी जोत विराजे त्रिभुवन में शंकर भोले आदि गीतों पर होली का गायन किया गया।
पाटी के मस्टा मंदिर में वीर भये रणधीर जगत में लवकुश दोनों वीर भये, जब पांडव यज्ञ रचाये कौरव आये सौ भाई, ओ झुकी ओ मोरे यार सीता रम भज हरि भज राधे आदि गीतों का गायन किया जा रहा है। रीठासाहिब, भिंगराड़ा, देवीधुरा, मूलाकोट, बर्दाखान, पुलहिंडोला, मडलक, दिगालीचौड़, रौंसाल आदि क्षेत्रों में भी होली गीत गाए जा रहे हैं।