चंपावत। दिल्ली की केजरीवाल सरकार नागरिकों को हर माह 20 हजार लीटर तक पानी मुफ्त में दे रही है, लेकिन अपने जिले में फ्री तो छोड़िए बिल चुका कर भी पानी मिलना टेढ़ी खीर हो गया है। ये नौबत भी गर्मी शुरू होने से पहले से ही शुरू हो गई है। चंपावत के लोगों को अब हर रोज पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते लोग नौले और हैंडपंपों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
फरवरी बीतने में अभी दो दिन बाकी है, लेकिन नगर के ज्यादातर इलाकों में पेयजल किल्लत बढ़ गई है। नागरिकों को एक दिन छोड़कर पानी मिलने लगा है। भेट्टी, शांत बाजार, भैरवां, खड़ी बाजार, कनलगांव, जीआईसी आदि क्षेत्रों में पेयजल का संकट सबसे अधिक है। इसके चलते लोग पानी ढोने को विवश हैं। जल संस्थान का कहना है कि चंपावत नगर को रोजाना 13.50 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता मात्र 4.50 लाख लीटर है।
कोट
जाड़ों में बेहद कम बारिश होने के चलते जल स्रोत काफी गिर गए हैं। रौखेत में 60 प्रतिशत और छीड़ापानी, च्यूराखर्क स्रोत में जल स्रोत में 40 प्रतिशत कम हो गया है। पहली मार्च को नगर क्षेत्र में पानी वितरण का रोस्टर जारी किया जाएगा।
परमानंद पुनेठा,
अपर सहायक अभियंता,
जल संस्थान, चंपावत।
क्वैराला पंपिंग योजना पूरा होने में देरी से इस बार बनी रहेगी पेयजल किल्लत
चंपावत। चंपावत नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को गर्मी में पेयजल किल्लत से निजात नहीं मिल सकेगी। निर्माणाधीन क्वैराला पेयजल योजना का काम इस साल मार्च तक पूरा होना संभव नहीं है।
योजना के तहत टैंक, पाइप लाइन, पावर हाउस, ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा होने के बाद अब बिजली लाइन बिछाने का काम चल रहा है। चंपावत क्षेत्र में 30 वर्ष तक पर्याप्त पेयजल देने के लिए 2015 में मंजूर 30.88 करोड़ रुपये की क्वैराला पेयजल योजना मंजूर की गई थी। पेयजल निगम के ईई वीके जोशी का कहना है कि काम को तेजी से पूरा कराया जा रहा है। अलबत्ता मार्च 2021 तक योजना पूरा होना कठिन होगा। इसके चलते इस बार लोगों को गर्मी में पानी की किल्लत से जूझना होगा।