धारचूला (पिथौरागढ़)। राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट में एसएसजेयू के एजुकेशन विभाग, महिला अध्ययन केंद्र की लक्ष्मी देवी टम्टा के नेतृत्व में भारत की वंचित समूह के सशक्तीकरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
प्रथम दिन तीन सत्र आयोजित किए गए जिसमें कुल 21 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इस दौरान वक्ताओं ने लैंगिक असमानताओं पर ध्यान आकर्षित किया।
मुख्य अतिथि विजया रानी ढोंडियाल, विशिष्ट अतिथि राजकीय पीजी कॉलेज गणाई गंगोली के प्राचार्य प्रो. सिद्धेश्वर सिंह, प्राचार्य डॉ. सुभाष वर्मा, सेमिनार की कोऑर्डिनेटर प्रो. संगीता, डाॅ. रंजीत माथुर, डॉ. अतुल चंद ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
डॉ. पूर्णिमा विश्वकर्मा और डॉ. संदीप कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि प्रो. विजय ढौढियाल ने लैंगिक असमानता के कई पहलुओं को उजागर करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रोफेसर सिद्धेश्वर सिंह ने हिंदी कविता में वांछित स्वर विषय पर अपने विचार रखे।
कविता के माध्यम से असमानताओं को दूर करने की बात कही। धर्म समाज कॉलेज अलीगढ़ के डॉ. माथुर ने वंचित समूह की असमानताओं पर अपने विचार व्यक्त किए। प्राचार्य प्रो. सुभाष वर्मा ने कहा कि वंचित और ओबीसी घोषित क्षेत्र में विश्वविद्यालय के सहयोग से सेमिनार करना इस क्षेत्र के लिए खुशी का विषय है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. कमल किशोर पांडे ने कहा कि दलितों, पिछड़ों महिलाओं आदि के लिए भारत सरकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसका लाभ उन्हें प्राप्त हो रहा है। महाविद्यालय एक प्लेटफार्म के रूप में उन्हें सहयोग प्रदान कर रहा है।
सहायक निदेशक डॉ. प्रमोद डोबरियाल जी ने कहा कि इस तरह के आयोजन से वंचित समूहों के विकास के रूपरेखा तैयार की जा सकेगी। प्रोफेसर रिजवाना सिद्दीकी ने लैंगिक असमानताओं के ऊपर ध्यान आकर्षित कराया।
डॉ. अतुल चंद ने आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. चंद्रा नांदल ने एक स्टॉल क्षेत्रीय जड़ी बूटी, घी, शहद का लगाया। यह स्टाल बेहद आकर्षण का केंद्र बना।