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वक्त पर नहीं मिला इलाज, रास्ते में प्रसूता की मौत

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खिरद्वारी के पास चूका गांव में बना निष्प्रयोज्य स्वास्थ्य केंद्र। - फोटो : CHAMPAWAT
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नेपाल सीमा से लगे चंपावत ब्लॉक के दूरस्थ खिरद्वारी गांव की वनरावत महिला की शिशु को जन्म देने के 9 दिन बाद मौत हो गई है। अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित प्रसूता को 15 किलोमीटर दूर अस्पताल लाया जा रहा था, तभी रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
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वनरावत पान सिंह रावत की पत्नी पुष्पा देवी (22) ने 1 नवंबर को अपने घर में शिशु को जन्म दिया। गरीब और निरक्षर क्षेत्र में न देखरेख की व्यवस्था थी और न ही गांव में कोई अस्पताल या एएनएम केंद्र।
प्रसूता की आठ नवंबर को एकाएक तबीयत बिगड़ गई। रक्तस्राव नहीं रुकने से प्रसूता को नौ नवंबर को गांव से 15 किलोमीटर दूर पैदल रास्ता तय कर चल्थी अस्पताल ले जाया जा रहा था लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। उसके नवजात शिशु की हालत ठीक बताई गई है।
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ग्राम प्रधान सचिन सिंह बोहरा, पूर्व प्रधान लक्ष्मी देवी और तल्लापाल क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता महेश चौड़ाकोटी का कहना है कि वनरावत गांव खिरद्वारी, चूका, कलसुनिया सहित आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से ग्रामीणों को अक्सर अकाल मौत का शिकार होना पड़ता है।
चूका में बने स्वास्थ्य केंद्र में किसी की तैनाती नहीं होने से उस इमारत का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने जल्द क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा में सुधार की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग कराएगा जांच : सीएमओ
चंपावत। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि प्रसूता की मौत की जानकारी उन्हें नहीं है। अब मामला संज्ञान में आने पर वे स्वास्थ्य विभाग से जांच कराएंगे। उन्होंने एसीएमओ इंद्रजीत पांडेय को जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि साथ ही खिरद्वारी या आसपास के किसी उपयुक्त स्थल पर एएनएम केंद्र के लिए प्रस्ताव भेजेंगे। तब तक यहां वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।ाएंगे।
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