फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टांण के लोगों का खत्म नहीं हो रहा डॉक्टर का इंतजार

विज्ञापन
टांण का राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
लधिया घाटी के दर्जनों गांवों के लोगों के इलाज के लिए टांण में अस्पताल तो खोला गया है लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। 33 महीने से यहां का अस्पताल डॉक्टरविहीन है। इस वजह से लोग अस्पताल के लाभ से वंचित है। इलाज के लिए यहां के लोग 99 किमी दूर चंपावत या लोहाघाट आने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

लधिया घाटी से लगे गांव टांण में राजकीय एलोपैथिक अस्पताल है। लाखों रुपयों से बना यह अस्पताल भवन लंबे समय से किसी काम का नहीं है। टांण, साल, ककनई, खटोली, वैला, मछियाड़ सहित कई गांव के दो हजार से अधिक लोग इस अस्पताल पर आश्रित हैं। अस्पताल में दिसंबर 2016 से डॉक्टर नहीं है। फार्मेसिस्ट सुंदरनाथ और वार्ड ब्वाय राजेंद्र गिरि गोस्वामी के जरिए मरीजों को छिटपुट दवाएं मिल पाती हैं।
लोगों का कहना है कि इलाज की सुविधा नहीं होने से वे चंपावत या लोहाघाट जाने को मजबूर होते हैं जिसमें वक्त और धन दोनों खर्च होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल मरीजों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उनके घावों को हरा करने वाला बन गया है। निवर्तमान ग्राम प्रधान भागीरथी गड़कोटी, आनंदी देवी, भोला दत्त, रामदत्त, गंगा जोशी, खीमानंद गड़कोटी आदि कई बार टांण अस्पताल में डॉक्टर की मांग भी कर चुके हैं लेकिन उनकी आवाज को भी अनसुना कर दिया गया।
विज्ञापन

लोहाघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी के चलते टांण अस्पताल के चिकित्साधिकारी को करीब तीन वर्ष पूर्व लोहाघाट संबद्ध किया गया है। टांण अस्पताल के लिए डॉक्टर की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें