केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संदर्भित गंगा प्रेम हॉस्पिटल (गंगा पॉलियम प्रेम प्रोजेक्ट उत्तराखंड) के माध्यम से प्रशामक देखभाल (पेलेटिव केयर) कार्यशाला हुई।
बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में प्रशामक और देखभाल विशेषज्ञ डॉ. तुष्टी भारद्वाज ने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशासक देखभाल विषय की जानकारी देने के साथ प्रशामक रोगों से संबंधित उपचार के तरीके बताए।
कार्यशाला में गंभीर बीमारियों के अलावा लाइलाज रोगियों की देखरेख में उपचार के साथ तकलीफ को कम करने के लिए किए जाने वाले उपाय बताए गए।
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए राजेंद्र बिजल्वाण ने वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) से व्यवहार, एनडीपीएस एक्ट और दर्द निवारण दवा प्रबंधन की जानकारी दी।
पीड़ा को दूर करने और लक्षणों को प्रबंध करने के लिए दवाएं और अन्य थेरेपी, परिवार के सदस्यों के लिए सहायता, घर में आरामदेह तरीके से रहने के तरीके व उपकरण, धार्मिक या सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मदद, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य देखरेख प्रदाताओं का नियमित रूप से मिलने आने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में चिकित्सक, नर्स, आशा वर्कर्स आदि मौजूद थे।
क्या है प्रशामक देखभाल
चंपावत। प्रशामक देखभाल जीवन को सीमित करने वाले रोगों से ग्रस्त लोगों को अधिक से अधिक बेहतर जीवन शैली पाने में मदद करती है। प्रशामक देखरेख का प्रयोग रोग के दौरान किसी भी समय किया जा सकता है। यह केवल उन लोगों के लिए नहीं है जो अपने जीवन के अंतिम चरण के करीब है, बल्कि किसी भी वक्त तकलीफ ग्रस्त व्यक्ति के लिए भी है। इस देखभाल में डॉक्टर, नर्स, फिजियोथेरेपिस्ट के अलावा आध्यात्मिक सलाहकारों या पेशेवरों द्वारा मदद ली जाती है।
डायरिया नियंत्रण पखवाड़े को लेकर बैठक आज
चंपावत। जिले में 22 जुलाई से दो अगस्त तक सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा तथा आठ अगस्त को नेशनल डिवार्मिंग डे के संचालन एवं क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से जिला सभागार में बैठक होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी खंडूरी ने जिला स्तरीय समन्वय समिति के सभी पदाधिकारियों से बैठक में उपस्थित होने को कहा है। ब्यूरो