पिथौरागढ़। जिले में छोटे बच्चों में एचएफएमडी (हाथ, पैर और मुंह रोग) की समस्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल में रोजाना 6 से 8 बच्चे एचएफएमडी से ग्रसित पाए जा रहे हैं। ग्रसित बच्चों से शिशुओं में भी एचएफएमडी फैलने का खतरा बना हुआ है।
एचएफएमडी गंदे पानी, गंदगी के कारण छोटे बच्चों में होने वाला एक तरह का संक्रमण है। एचएफएमडी आमतौर पर कॉक्ससैकी वायरस के कारण होता है। यह संक्रमण एक बच्चे से दूसरे बच्चे में हाथ, छींकने, लार, मल और सांस के माध्यम से फैलता है। इस संक्रमण में आमतौर पर बच्चों को तेज बुखार, हथेली व पांव पर छाले जैसी समस्या देखने को मिलती है।
बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक जिला अस्पताल में रोजाना 100 से 120 की ओपीडी होती है। इसमें से लगभग आठ बच्चे एचएफएमडी से ग्रसित पाए जा रहे हैं। एचएफएमडी के बिगड़ने पर बच्चों को हर्पेंजिया रोग हो जाता है, जो बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक है। इस बीमारी में बच्चों को बुखार सर पर चढ़ जाता है। तेज सिर दर्द जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक एचएफएमडी से ग्रसित बच्चा एक से तीन सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है। चिकित्सक से बच्चों की जांच करानी आवश्यक है।
इनसेट
इन बातों का रखें ध्यान
- एचएफएमडी से ग्रसित बच्चों को नियमित हाईड्रेशन, उच्च प्रोटीन और पौष्टिक भोजन का सेवन करने की आवश्यक होती है।
- छोटे बच्चों को बीमारी ठीक नहीं होने तक घर पर ही रखें।
-संक्रमण के फैलने के कारण बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज करें।
कोट
साफ और स्वच्छ पानी का सेवन करें। बच्चों को बुखार और हथेली, पांव में छाले की समस्या होने पर शीघ्र चिकित्सीय जांच कराए। - डॉ. विजय पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल