टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन चल्थी का पुल। संवाद
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल्थी का निर्माणाधीन पुल बस अगले तीन महीने में पूरा हो जाएगा। अक्तूबर 2021 की आपदा से हुए नुकसान से इस पुल का काम एक साल पीछे हो गया है। तीन महीने पहले इस क्षतिग्रस्त निर्माणाधीन पुल के फाउंडेशन टावर और जैक के हिस्सों की गाजियाबाद में मरम्मत के बाद चल्थी पहुंच गए हैं। आजकल इन हिस्सों को जोड़ने का तेजी से काम चल रहा है।
एनएच पर बारहमासी सड़क परियोजना में चल्थी पुल पहाड़ और मैदान को जोड़ने की अहम कड़ी है। लधिया नदी पर बनने वाले 120 मीटर लंबे और 14.90 मीटर चौड़े इस पुल का काम दिसंबर 2021 तक पूरा होना था लेकिन 18 अक्तूबर 2021 की आपदा से निर्माणाधीन चल्थी पुल के पांच जैक और दो फाउंडेशन टावर नदी में बह गए जिसके बाद निर्माण पूरा होने की तिथि आगे खिसक गई।
जैक एवं टावर खोजने के बाद मरम्मत के लिए गाजियाबाद भेजा गया। पिछले साल सितंबर में पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के ठीक होकर आने से अब फिर से काम शुरू हो गया है। जैक और टावर को लगाने का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष काम भी मार्च से पहले पूरा करा लिए जाने की बात कही गई है। पुल का संचालन होने से न केवल आवाजाही सुचारु होगी बल्कि 300 मीटर दूरी भी कम होगी। संवाद
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन चल्थी पुल पर जैक और लोहे के टावर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि मार्च 2023 तक पुल का काम पूरा करा लिया जाएगा। -सुनील कुमार, ईई, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लोनिवि, लोहाघाट।
साढ़े छह दशक पुराना पुल बना है सहारा
चंपावत। चल्थी के नए पुल का काम अभी बाकी है। एनएच पर आवाजाही चल्थी के पुराने पुल से हो रही है। खंभों के सहारे बगैर वर्ष 1955 में बने 110 मीटर लंबे और दस फीट चौड़े इस पुल का पूरा वजन उसके ऊपरी (धनुष आकार वाले ढांचे पर) हिस्से पर टिका है लेकिन कम चौड़ाई के चलते पुल से एक बार में एक ही वाहन गुजर सकता है। संवाद