लोहाघाट (चंपावत)। पांच गांव सुंई और बीस गांव बिशुंग के प्रसिद्ध अषाढ़ी वायुरथ महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को मां भगवती की भव्य वायुरथ यात्रा निकाली गई। यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मां भगवती का आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र मां के जयकारों से गूंजता रहा।
महोत्सव के तहत शुक्रवार को चारद्योली के सभी आयुधों को सुंई स्थित आदित्य महादेव मंदिर लाया गया। यहां हवन-यज्ञ के बाद आयुधों को दूध और पवित्र जल से स्नान कराया गया। पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद सभी देवडांगरों को अंगवस्त्र भेंट किए गए। इसके बाद मां भगवती की गुप्त प्यौली को आदित्य महादेव मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई गई।
इसके बाद मां भगवती का वायुरथ 52 बेतालों और 64 योगिनियों के साथ बिना रस्सों के सहारे यात्रा पर निकला। वायुरथ मंदिर से गलचौड़ा, पऊ, चनकांडे और डुंगरी होते हुए द्यौलागढ़ पहुंचा। यहां देवडांगरों ने चावल और दूध की गाल खाई। इसके बाद यात्रा खैसकांडे होते हुए उख्खाकोट की दुर्गम पहाड़ी को पार कर बीस गांव बिशुंग की परिक्रमा के लिए आगे बढ़ी।
यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर बेतालों ने दूध और चावल की गाल खाई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां भगवती के वायुरथ पर अक्षत और पुष्पों की वर्षा कर आस्था व्यक्त की। वायुरथ के बिशुंग क्षेत्र में पहुंचते ही पूरा वातावरण मां भगवती के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद वायुरथ देर रात सुंई स्थित आदित्य महादेव मंदिर पहुंचा। यहां आरती के बाद प्यौली को उसके गंतव्य मां भगवती मंदिर, चौबेगांव के लिए रवाना किया गया।
महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्याम चौबे, मुख्य संरक्षक सचिन जोशी समेत समिति के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का स्वागत किया।