चंपावत। 240 रुपये और 250 मुर्गी के बच्चे (चूजे)। यकीन नहीं होता लेकिन ये सच है। सहकारिता विभाग की छह समितियों की ओर से संचालित मुर्गी पालन घाटी (पोल्ट्री वैली) योजना 300 किसानों के लिए हैं। गांवों में स्वरोजगार के जरिए पलायन रोकने लिए इस योजना को लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत दो स्थानों पर मद यूनिट स्थापित की जाएगी।
वर्ष 2025 तक चलने वाली मुर्गी पालन घाटी योजना के तहत हर साल 300 लोगों को मुर्गी पालन से जोड़कर आय बढ़ाई जाएगी। वर्तमान वित्त वर्ष के लिए पात्र लोगों का चयन कर लिया गया है। इस साल छह समितियां इस योजना को जमीन पर क्रियान्वित करेंगी। ग्राम विकास, सहकारिता और पशुपालन विभाग योजना का संचालन और निगरानी करेगा। चंपावत और टनकपुर की एमपैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) को मदर यूनिट बनाया गया है।
इन दोनों समितियों में मुर्गी के बच्चों को 21 दिन तक पालने के बाद चयनित लोगों को दिए जाएंगे। चयनित लोगों को मुर्गी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मुर्गीपालन के लिए बाड़ा बनाने के लिए 1.60 लाख रुपये ब्याज रहित कर्ज देने की सुविधा भी रखी गई है। दो माह तक मुर्गियों को पालने के बाद मुर्गी पालकों के पास इन मुर्गियों को 110 रुपये किलो की दर पर सहकारिता विभाग के जरिए बिक्री का विकल्प भी है। संवाद
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जिले में हैं 1.21 लाख मुर्गियां
चंपावत। जिले में 1.21 लाख से अधिक मुर्गियां हैं। 114195 मुर्गे, मुर्गियां और चूजों के अलावा 7382 अन्य कुक्कुट (मुर्गा और बनमुर्गा) हैं।
योजना की खूबियां
- टनकपुर, धूरा, अमोड़ी, चंपावत, सिप्टी और मंच की समितियों को योजना से जोड़ा गया है।
- हर समिति से 50-50 सदस्यों का चयन किया गया है। - हर सदस्य को 21 दिन के 250 चूजे मिलेंगे।
कोट
मुर्गी पालकों का चयन कर लिया गया है। चूजे देने से पहले मुर्गी पालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहकारिता विभाग की निगरानी के अलावा पशुपालन विभाग के चिकित्सक नियमित रूप से इन मुर्गियों की देखरेख करेंगे। मुर्गी पालकों को आर्थिक सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर खरीद की व्यवस्था भी है।
सुभाष चंद्र गहतोड़ी, जिला सहायक निबंधक, चंपावत।