मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए परिजनों के साथ आई बुलंदशहर जिले की दस वर्षीय बच्ची शारदा नदी में डूब गई। उसके चाचा और ममेरे भाई ने जान पर खेलकर उसे बाहर निकाला। तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई।
बुलंदशहर जिले के रामनगर डिवाई निवासी यशपाल की पत्नी पूजा देवी, दस साल की बेटी कोमल और बारह साल का बेटा सोजल रिश्तेदारों के साथ मां पूर्णागिरि के दर्शन करने शुक्रवार सुबह टनकपुर पहुंचे। शारदा घाट पर स्नान के बाद सभी लोग नदी किनारे टनकपुर-बूम पैदल मार्ग से पूर्णागिरि जा रहे थे। उचौलीगोठ के पास प्यास लगने पर कोमल शारदा नदी में पानी पीने लगी। इस दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नदी में डूब गई।
कोमल की मां और अन्य रिश्तेदार घटनास्थल से आगे निकल गए थे, जबकि कोमल के साथ ममेरा भाई राजू और चाचा विजय सिंह थे। कोमल के डूबते ही इन दोनों ने उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। दोनों को तैरना नहीं आता था। दोनों ने किसी तरह कोमल को नदी से निकाल लाए। बेहोश कोमल को लेकर सड़क पर पहुंचे और एक टैक्सी चालक ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
समय पर उपचार मिलता को बच सकती थी कोमल की जान
मासूम कोमल को समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी, लेकिन मेले में न तो उपचार की सुविधा और न ही सुरक्षा के इंतजाम। डूबने के करीब पांच मिनट के अंदर ही परिजनों ने कोमल को नदी से बाहर निकाल लिया था, लेकिन घटनास्थल से सड़क तक पहुंचने और फिर टैक्सी से अस्पताल पहुंचने में ज्यादा समय लगने से मासूम की जान चली गई। राजू ने बताया कि नदी से निकालने के बाद कोमल की नब्ज चल रही थी। रास्ते में भी चेक किया तो वह जिंदा थी, लेकिन अस्पताल पहुंचे तो डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
शारदा घाट पर बस खड़ी कर पैदल जा रहे थे
कोमल के परिजन और रिश्तेदार भी प्राइवेट बस से आए थे, लेकिन किसी उनसे कह दिया कि बूम तक बस जाने पर प्रतिबंध लगा है। इस पर उन्होंने शारदा घाट पर बस खड़ी कर टनकपुर से बूम तक शारदा किनारे-किनारे पैदल रास्ते से पूर्णागिरि जाने का फैसला लिया, जबकि प्राइवेट बसें बूम पार्किंग स्थल तक जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
टनकपुर (चंपावत)। शारदा में डूबने से दस साल की मासूम कोमल की मौत की घटना ने मां पूर्णागिरि के दर्शन को आ रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रों में उत्तर भारत समेत देश के कोने-कोने सेे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस के पास पर्याप्त फोर्स ही नहीं है। स्नानघाटों पर भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को न तो रेस्क्यू फोर्स है और न ही पर्याप्त संसाधन।
उत्तर भारत के पूर्णागिरि की सुरक्षा के लिए इस बार लोकसभा चुनाव के कारण पर्याप्त फोर्स नहीं मिल पाया है। हालांकि चुनाव निपटने के बाद 12 मई से फोर्स से पर्याप्त फोर्स मिलने की उम्मीद है, लेकिन चैत्र नवरात्र और लोकसभा चुनाव साथ-साथ होने से मेले की सुरक्षा में फोर्स की कमी आड़े आ रही है। बताया जा रहा है कि अभी मेले में तैनात बाहरी जिलों से आया फोर्स भी मतदान से पहले चुनाव ड्यूटी के लिए वापस लौट जाएगा। ऐसे में नवरात्रों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की सुरक्षा महज जिले के पुलिस फोर्स के लिए बड़ी चुनौती होगी। शारदा स्नानघाट और बनबसा स्नानघाट पर जल पुलिस के दो-दो जवान तैनात हैं, उनके पास भी सिवाय लाइफ जैकेट के रेस्क्यू के कोई और संसाधन नहीं है। वहीं, बूम घाट में सुरक्षा व्यवस्था महज एक सिपाही के भरोसे चल रही है।
स्थानीय तैराक युवकों की ली जाएगी मदद
स्नानघाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध फोर्स तैनात किया गया है। फोर्स की कमी सुरक्षा में जरूर आड़े आ रही है, लेकिन घाटों पर तैराक पुलिस के जवानों के साथ ही स्थानीय तैराक युवकों की भी मदद लेने पर विचार चल रहा है।
- नरेश चंद, सीओ टनकपुर