चंपावत। राज्य में लंबे समय से लिंगानुपात एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय रहा है। पुत्र को प्राथमिकता देने की मानसिकता, भ्रूण लिंग जांच, बालिकाओं के प्रति भेदभाव और उनकी उपेक्षा जैसे कारणों से कई क्षेत्रों में लिंगानुपात असंतुलित हुआ। चंपावत जिले में लिंगानुपात में छह फीसदी नीचे गिरा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में लिंगानुपात 928 था। 2024-25 में बढ़कर 934 तक पहुंच गया। इसमें छह प्रतिशत की बढ़त हुई, लेकिन 2025-26 में यह आंकड़ा 928 दर्ज किया गया है। यानी छह फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि विभाग का कहना है कि यह आंकड़ा स्थिर है।
लिंगानुपात किसी समाज में महिलाओं और पुरुषों की संख्या के संतुलन को दर्शाता है। अभी चंपावत में आदर्श आंकड़े तक पहुंचने में समय लगेगा। आदर्श आंकड़ा समाज की सामाजिक सोच, लैंगिक समानता और महिलाओं की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। छह प्रतिशत की कमी अभी भी समाज को जागरूक करने की ओर इशारा कर रही है। एसीएमओ इंद्रजीत पांडे के ने बताया संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से भी बालिकाओं के जन्मदर में सुधार देखने को मिला है। इससे परिवारों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर मजबूत हुआ है। लोग जागरूक हुए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जिले का लिंगानुपात आदर्श किया जाए। 1000 पुरुष में 946 का लिंगानुपात आदर्श माना जाता है। संवाद