बसों की कमी से अधिकांश ग्रामीण मार्ग पर रोडवेज की बस सेवा ठप हो गई। दो साल में पांच बसें कम हो गई। अब सिर्फ आठ रूटों पर बस सेवा चल रही हैं। मैक्स कैब सेवा का भी लोहाघाट से संचालन नहीं हो रहा है। इसके चलते लोगों को अधिक किराया देकर टैक्सियों से सफर करना पड़ रहा है। वहीं, रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से गांवों के वरिष्ठ नागरिक मुफ्त यात्रा सुविधा के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
दो वर्ष पहले तक लोहाघाट डिपो में 40 बसों का संचालन होता था। लेकिन कुछ बसों की निर्धारित दूरी पूरी होने के बाद नीलाम कर दिया गया। उनके स्थान पर कम बसें ही डिपो को मिली। वर्तमान में सिर्फ 35 बसों से ही काम चलाया जा रहा है।
रोडवेज प्रशासन लोहाघाट से दिल्ली के लिए चार, देहरादून, बरेली, हरिद्वार, काशीपर के लिए दो-दो, ऋषिकेश, रुड़की, हल्द्वानी के लिए एक-एक बसों का संचालन कर रही है। बरेली, दिल्ली रूट पर एक-एक बस घटाई गई है। रोडवेज को इन बसों से आमतौर पर चार लाख रुपये रोजाना की आय होती है। अलबत्ता बरसाती मौसम में आमदनी घटकर करीब तीन लाख रुपये होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संचालन न होने से 65 वर्ष पूरे कर चुके बुजुर्ग, छात्राओं, विकलांगों को सरकार द्वारा रोडवेज बसों में दी जाने वाली मुफ्त यात्रा का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे उन्हें न केवल जेब ढीली करनी पड़ती है, बल्कि निजी वाहनों में अधिक किराया देकर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बसों की कमी से कई रूट पर बस सेवा बंद हुई है। मैक्स कैब के लिए भी यहां टैक्सी संचालकों में उत्साह कम है। इसकी वजह से लोहाघाट डिपो से अभी एक भी कैब संचालित नहीं हो सकी है। नई बसों के आने के बाद से बंद रूटों पर बस दोबारा चलाई जाएगी।
मोहम्मद नसीर, सहायक मंडलीय प्रबंधक उत्तराखंड परिवहन, लोहाघाट डिपो।