जिले में मानसून सत्र में दैवी आपदा के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावी तरीके से संचालित किया जाएगा। बुधवार को जिलाधिकारी डा.अहमद इकबाल ने कलक्ट्रेट सभागार में आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए इंसीडेंट रिस्पोंस सिस्टम (आईआरएस) के तहत आपसी सामंजस्य तथा बेहतर तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
उन्होंने आईआरएस सिस्टम की पूरी कार्य प्रणाली को बेहतर तरीके से समझकर अपने अधीनस्थों की जिम्मेदारी तय करते हुए आपदा के दौरान कम से कम समय में राहत कार्य शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। डीएम ने आईआरएस सिस्टम को प्रभावी बनाने और संभावित कमियों को दूर करने के लिए मॉकड्रिल अभ्यास का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश आपदा प्रबंधन अधिकारी को दिए।
उन्होंने कहा कि आपदा के समय सबसे पहले सूचना स्थानीय लोग ले सकते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर युवक मंगल दल, महिला मंगल दल तथा ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को आपदा से बचाव के साथ-साथ आपदा उपकरणों के संचालन की जानकारी दी जानी आवश्यक है। उन्होंने टीम प्रभारियों, एरिया कमांडर, तहसीलदार आदि को वायरलेस सेट और आपदा उपकरणों के साथ तैयार रहने के लिए कहा। मानसून सत्र में सड़क अवरुद्ध होने के संभावित संवेदनशील स्थलों का चयन करते हुए पैराफिट, ब्रेकर, होर्डिंग आदि लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने जीर्ण क्षीर्ण स्कूलों तथा आंगनबाड़ी भवनों की जानकारी लेते हुए बरसात के दौरान पंचायत भवनों और अन्य सुरक्षित भवनों में कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए। आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने प्रोजेक्टर के माध्यम से आपदा प्रबंधन के तहत अब तक किये गये कार्यों की जानकारी दी। बैठक में एडीएम जेएस राठौर, सीडीओ हरगोविंद भट्ट, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, निर्मला बिष्ट, सीएस डोभाल, नरेश दुर्गापाल, सीओ राजन सिंह रौतेला, एआरटीओ रश्मि पंत, डीडीओ विवेक उपाध्याय, सीएमओ विनोद टोलिया, सीईओ एनसी पाठक सहित सभी अधिकारी उपस्थित रहे।