लोहाघाट (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे विभिन्न गांवों में आयोजित गौरा महोत्सव का समापन हो गया है। इस दौरान महिलाओं ने नम आंखों से गौरा-महेश को विदाई दी। देवडांगरों ने अवतरित होकर क्षेत्रवासियों को सुख, शांति का आशीर्वाद दिया।
जिंडी, सुनकुरी, जमरसों, सेलपेडू, चमदेवल के जिंडी में मेले का आयोजन किया गया। दोपहर बाद गौरा महोत्सव स्थल में महिलाओं और पुरुषों ने दैईना होये तू गौरा देवी, फिर रितु खेलन ऊंना, हाई हो फिर ऋतु खेलन ऊना आदि गीतों का गायन किया। जिंडी गांव से गौरा-महेश की प्रतिमा को ढोल, नगाड़ों के साथ चमदेवल शिवालय में विसर्जन के लिए लाया गया।
सुबह गौरा देवी मंदिर में पंडित मदन कलौनी ने पूजा कराई। कोलीढेक, सुंई, नौमाना, नदेड़ा, सिंगदा आदि गांवों में गौरा महोत्सव में मां गौरा महेश से अगले साल फिर मिलने के वायदे के साथ विदाई दी गई। इस दौरान प्रताप चंद, भगत राम, बृजमोहन, गोपाल राम, प्रेम चंद, महेश चंद, रीता देवी, पुष्पा देवी, ललित चंद, खुशाल चंद, लक्ष्मण चंद, दीपक सिंह, दिनेश सिंह आदि रहे।