क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडरों का संकट थम नहीं रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर क्षेत्र में लोग गैस के लिए तड़के चार बजे से ही लाइन लगाने को मजबूर हैं। इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में लोग बिना गैस के ही मायूस होकर लौट रहे हैं। लोहाघाट गैस एजेंसी में 2 हजार सिलेंडरों का बैकलॉग है।
शनिवार को गैस एजेंसी में सिलेंडरों की दो गाड़ियां आई। इसमें एक गाड़ी से एजेंसी में आपूर्ति की गई। जबकि दूसरी गाड़ी से पाटन क्षेत्र में रसोई गैस के सिलेंडर बांटे गए। शीघ्र ही सिलेंडर खत्म होने से बड़ी संख्या में लोग मायूस होकर लौट गए। काफी लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। गैस गोदाम प्रभारी गिरीश चंद्र आर्या ने बताया कि एजेंसी में 2 हजार गैस सिलेंडरों का बैकलॉग है।
जुलाई में एजेंसी में प्लांट से सिलेंडरों की पांच गाड़ियां गैस कम आई। जबकि इस माह के 19 दिनों में रसोई गैस के सिलेंडरों की 25 गाड़ियों के सापेक्ष मात्र 15 गाड़ियां आई है। बताया कि अगस्त में भिंगराड़ा, मडलक, पाटन, जनकांडे, धूनाघाट आदि ग्रामीण क्षेत्रों में ही गैस बंट पाई है। जबकि किमतोली, गंगनौला, चौकड़ी, खालगढ़, पुल्ला, चमदेवल, गल्लागांव, गलचौड़ा, सुंई, बाराकोट, पोखरखाल, काकड़, बर्दाखान, बैडा, कामाजूला, पाटी, पोखरी, खेतीखान, शिलिंग, ढेरनाथ, कर्णकरायत, चौमला, रौंसाल, चौमेल, मरोडाखान, रीठासाहिब, खीड़ी, विविल आदि क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति नहीं की जा सकी है।