फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लधिया और रतिया में डाला जा रहा है कूड़ा

Thu, 13 Apr 2017 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
विज्ञापन
रीठासाहिब में लधिया नदी में इस तरह से डाली जा रही है प्लास्टिक की गंदगी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पूरे देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाए जाने के बाद भी स्थानीय नदी नालों में कूड़ा करकट डालने का सिलसिला जारी है। मीठे रीठे के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्रीरीठासाहिब में लधिया और रतिया नदियों में भी सीधे कूड़ा डाला जा रहा है। पॉलिथीन की थैलियों और प्लास्टिक की बोतलें लधिया और रतिया के संगम को दूषित कर रही हैं। संगम पर पवित्र स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य छोटे बड़े नालों में भी प्लास्टिक का कूड़ा धड़ल्ले से फेंका जा रहा है। 
विज्ञापन

नदियों के माध्यम से पॉलिथीन एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रही है। जिले के ग्रामीण कस्बाई इलाकों में नियमित साफ सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय स्तर पर व्यापारी और ग्रामीण मिलकर ही साफ सफाई करते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पीएलवी उमेश भट्ट का कहना है कि गैर सरकारी संगठनों, स्कूली बच्चों और विभागों की ओर से तमाम तरह के जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाने के बाद भी अधिकांश लोग प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। 

पॉलिथीन के उत्पादन पर रोक लगे
व्यवसायी हरमोहन सिंह का कहना है कि आज बाजार में हर सामान की पैकिंग पॉलिथीन की थैलियों में आ रहा है। यदि पॉलिथीन के उत्पादन पर ही रोक लगा दी जाए तो पहाड़ के गांवों तक कचरा पहुंच ही नहीं पाएगा, और नदी नाले सुरक्षित रहेंगे।
विज्ञापन



भूमिगत जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना जरूरी
सामान्य गृहिणी केशवी देवी के अनुसार पॉलिथीन के असर के कारण क्षेत्र के भूमिगत जल स्रोतों में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि भूमिगत जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना जरूरी है। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब लोगों को पीने के शुद्ध पानी के लिए तरसना पड़ेगा।

ग्राम स्वच्छता समितियों को किया जाएगा सक्रिय
पाटी के नायब तहसीलदार एल एम तिवारी का कहना है कि रीठासाहिब क्षेत्र में साफ सफाई के लिए स्थायी व्यवस्था न होने से दिक्कतें पेश आ रही हैं। अलबत्ता क्षेत्र के नदी नालों को प्रदूषण से बचाने के लिए ग्राम स्वच्छता समितियों को सक्रिय किया जाएगा। इनके माध्यम से अभियान चलाकर नदी नालों की सफाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें