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फ्री की पढ़ाई, फिर भी घट गई छात्रसंख्या

Tue, 31 May 2016 10:19 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
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छात्रा - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी स्कूलों में लगातार छात्र संख्या घटती जा रही है। इस साल भी एक प्राथमिक स्कूल पर ताला लटक गया है और इस कतार में पांच दर्जन से अधिक स्कूल शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में बीते पांच वर्षों में तेजी से कमी आई है।

2011 में 512 स्कूलों में 20014 छात्र थे, जो पिछले साल तक कम होकर 16321 रह गए हैं। यानि पांच वर्ष में न केवल 8 स्कूल बंद हुए, बल्कि 3693 बच्चे भी घट गए। ये आलम तब है, जब सरकारी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई के अलावा पुस्तकों से लेकर मध्यान्ह भोजन योजना और वजीफे तक की सुविधा है।
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दूसरी तरफ महंगी फीस वाले प्राइवेट स्कूलों की तस्वीर बदली हुई है। नर्सरी में ही 700 रुपये मासिक फीस होने के बावजूद प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वालों की लाइन लंबी होती जा रही है। प्राइवेट स्कूलों में 2011 में 10658 बच्चे पढ़ते थे, जो अब बढ़कर 13147 पहुंच गए हैं। यानि पांच साल में छात्रों की संख्या में 2489 की बढ़ोतरी हो गई। दो वर्षों में ही जिले में चार नए प्राइवेट स्कूल खुल चुके हैं, जबकि इस दौरान तीन सरकारी विद्यालयों पर छात्र नहीं होने से ताले लटक गए हैं।

छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग स्कूल चलाओ अभियान सहित कई मुहिम चला रहा है, मगर कई जगह गांवों में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों की संख्या लगातार कम होने से प्राइमरी स्तर पर पढ़ने वाले नहीं मिल रहे हैं। बावजूद इसके विभाग बेहतर शिक्षा और गुणवत्ता के लिए निरंतर कदम उठा रहा है। -नवीन चंद्र पाठक, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।


सरकारी स्कूलों में नहीं है भविष्य
ज्यादातर अभिभावकों का कहना है कि वे सरकारी स्कूलों के बजाय महंगे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं, क्योंकि मौजूदा दौर में सरकारी प्राइमरी स्कूलों से पढ़े बच्चों को आगे चलकर रोजगार मिलना संभव नहीं होता। शिक्षाविदों का भी कहना है कि इन स्कूलों की पढ़ाई के पैटर्न से लेकर जिम्मेदारी से भागने वाले शिक्षकों की मानसिकता में व्यापक बदलाव जरूरी है। नुमाइंदों, सरकारी कार्मिकों और अफसरों के बच्चों को भी इन स्कूलों में पढ़ने को बाध्य किए बगैर हालात में सुधार मुमकिन नहीं लगता।
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516 के बजाय 504 रह गए प्राथमिक विद्यालय
चंपावत जिले में एक दशक से भी कम वक्त में 12 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों पर ताला लटक गया है। खुनाड़ी, कोट जमराड़ी, सेलागाढ़, दियूली, खुरपाली, कोटला, झिरकुनी, भनार, पुरोला, गहतोड़ा, मध्यावली और हल्दुवा प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं। इस तरह 516 के बजाय प्राथमिक विद्यालयों की संख्या घटकर 504 हो चुकी है, वहीं 47 विद्यालयों की छात्र संख्या दस से भी कम है।
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