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चंपावत: चंद राजाओं की राजधानी...विकास के पड़ाव तो दिखे, पर गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे

Tue, 15 Sep 2026 12:37 PM IST
Heera पंकज पाठक

सार

चंपावत जिले ने 15 सितंबर 1997 को अस्तित्व में आने के 29 वर्ष पूरे कर लिए हैं। विकास के कई पड़ावों के बावजूद दूरस्थ गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। 
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chamapwat - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुमाऊं के चंद राजाओं की राजधानी रहा चंपावत जिला 15 सितंबर 1997 को अस्तित्व में आने के 29 वर्ष पूरे कर चुका है। इन वर्षों में जिले ने विकास के कई पड़ाव देखे, लेकिन आज भी कई गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे अधिक उम्मीद है, जिसका अभाव दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सीमित चिकित्सा सुविधाओं के कारण गंभीर बीमारी या उपचार के लिए लोगों को पिथौरागढ़, खटीमा, हल्द्वानी और बरेली जाना पड़ता है। सड़क सुविधा की कमी भी जिले के विकास में बड़ी बाधा है। कई दूरस्थ गांव आज भी सड़क पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। आवागमन की बेहतर सुविधा नहीं होने से कई गांवों से पलायन का सिलसिला भी जारी है। सीएम पुष्कर धामी के चंपावत से चुनाव जीतने के बाद पिछले ढाई वर्षों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार में काफी काम हुआ है। हालांकि, दूरस्थ गांवों तक इन सुविधाओं की पहुंच अब भी एक चुनौती बनी हुई है।

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लोगों का कहना है कि चंपावत को आदर्श जिला बनाने के लिए दुर्गम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा। स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं को प्राथमिकता देना भी अत्यंत आवश्यक है। जिले में सड़क, रेल, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, धर्म, संस्कृति, पशुपालन और ग्रामीण अवसंरचना के काम लगातार जारी हैं। उत्तर भारत का प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मेला और ऐतिहासिक मां वाराही धाम का बगवाल मेला विशिष्ट पहचान लिए हुए हैं। टनकपुर से देश के विभिन्न स्थानों पर ट्रेनों के संचालन से यातायात मजबूत हुआ है। बनबसा के गुदमी में बन रहा लैंड ड्राईपोर्ट नेपाल और भारत के बीच कारोबार तेजी से बढ़ाएगा। शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर का निर्माण आने वाले समय में धार्मिक, खेल और साहसिक पर्यटन को और मजबूत करेगा। जिले में हल्द्वानी टू चंपावत हेलीसेवा ने लोगों के लिए यातायात को सुगम किया है। टीजे सड़क पूरी होने के बाद सीमांत पिथौरागढ़ तक का सफर आसान होगा।हवाई सेवा को और अधिक मजबूत करने के लिए हवाई पट्टी निर्माण की भूमि तलाशी जा रही है। पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में रोपवे निर्माण से मां के दरबार तक दूरी मिनटों में रह जाएगी, जिससे समग्र विकास की एक बेहतर उम्मीद का मार्ग प्रशस्त होगा।

लैंड ड्राईपोर्ट: भारत-नेपाल व्यापार और संबंधों को मिलेगी नई उड़ान
बनबसा के गुदमी में प्रस्तावित लैंड ड्राईपोर्ट भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक एवं यात्री आवागमन को नई गति देगा, साथ ही दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना से सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस ड्राईपोर्ट के निर्माण का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है। यह परियोजना 84 एकड़ वन भूमि पर फैलेगी और इसमें पैसेंजर टर्मिनल, पार्किंग स्थल, एडमिन ब्लॉक, पोर्टर्स एरिया और वॉच टावर जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। भारत की ओर लगभग चार किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जाना है, जबकि नेपाल ने अपनी ओर से ड्राईपोर्ट निर्माण का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है।वहीं, नेपाल ने अपनी तरफ से लैंड ड्राईपोर्ट के निर्माण का काम पहले ही शुरू कर दिया है। लैंड ड्राईपोर्ट के निर्माण का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है। इसके बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है। इस परियोजना के पूरा होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह लैंड ड्राईपोर्ट दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज: चंपावत की माटी में सीख बारीकियां, देश का नाम करेंगी रोशन

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जिले के लोहाघाट के छमनिया में राज्य का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज का संचालन शुरू हो गया है। प्रदेश की बालिकाएं यहां पर प्रशिक्षकों से खेल की बारीकियां सीख देश विदेश में अपना नाम रोशन करेंगी। करीब 237 करोड़ रुपये से प्रथम महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण जारी है। इसमें प्रस्तावित फुटबाल ग्राउंड, हॉकी ग्राउंड, वॉलीबाल सहित अन्य खेल मैदान, खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल, स्टाफ क्वार्टर और प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में 30 बालिकाएं कॉलेज में प्रशिक्षण ले रही हैं, इसमें एथलेटिक्स, बैडमिंटन और बॉक्सिंग खेल का संचालन हो रहा। पूरी तरह स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण होने के बाद खेल सुविधाओं का भी विस्तार होगा।

टनकपुर का शारदा घाट बनेगा धार्मिक और आस्था का केंद्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट शारदा घाट का 185.20 करोड़ रुपये की लागत से भव्य पुनर्निर्माण किया जा रहा है। घाट के आधुनिक और आकर्षक स्वरूप में विकसित होने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। ऋषिकेश की तर्ज पर यहां नियमित रूप से भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। करीब 520 मीटर लंबे और 75 मीटर चौड़े घाट में स्नान घाट, अंतरराष्ट्रीय स्तर का आरती स्थल, विश्राम की सुविधाएं, सुगम पहुंच मार्ग, पैदल पथ, प्रकाश व्यवस्था और व्यापक सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। आरती स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा है। परियोजना में रेनवाटर हार्वेस्टिंग और फ्लोर कूलिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। भव्य शारदा घाट के तैयार होने से धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

गोल्ज्यू कॉरिडोर: मिलेगा आधुनिक और बेहतर खेल मैदान, पर्यटन आस्था होगी मजबूत
जिला मुख्यालय में प्रस्तावित गोल्ज्यू कॉरिडोर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देने के साथ युवाओं के खेल के सपनों को भी उड़ान देगा। करीब 570 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण अलग-अलग चरणों में किया जाना है। कॉरिडोर के विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत 400 मीटर रनिंग ट्रैक, बहुउद्देशीय सभागार, हॉकी फील्ड, बैडमिंटन हॉल, पार्किंग और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर, ओपन एयर थिएटर, कॉमर्शियल जोन और अंडरग्राउंड ऑटोमेटेड पार्किंग का भी निर्माण प्रस्तावित है। सीएम पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के बाद करीब 15 साल से अधिक समय बाद गौरलचौड़ मैदान की भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरण हुई। मैदान की कुछ भूमि सेना की होने के चलते सुधारीकरण भी मैदान का नहीं हो पा रहा था। कॉरिडोर के आकार लेने से युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिलने के साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के पूरा होने पर यह क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य: सुविधाएं और बेहतर होने की उम्मीद
चंपावत जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है, लेकिन सुविधाओं के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने से मरीजों को पूरी राहत नहीं मिल पा रही है। जिला अस्पताल चंपावत में तीन डायलिसिस मशीनों और उप जिला अस्पताल टनकपुर में तीन डायलिसिस यूनिट की स्थापना स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। पहाड़ी जिलों में जिला अस्पताल चंपावत में शुरू हुई एमआरआई सुविधा भी मरीजों के लिए काफी राहत दे रही है। वहीं, ब्लड कंपोनेंट यूनिट की स्थापना भी मरीजों के लिए वरदान साबित होने की उम्मीद है। इन उपलब्धियों के बावजूद जिले के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। मैदानी क्षेत्र के प्रमुख अस्पताल उप जिला अस्पताल टनकपुर में बाल रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं। लोहाघाट उप जिला अस्पताल के साथ ही जिला अस्पताल चंपावत में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ अब लोगों को उम्मीद है कि इन आधुनिक मशीनों और चिकित्सा सुविधाओं का बेहतर लाभ दिलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों भी अस्पतालों को मिलेंगे। इससे जिले के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और आदर्श जिले की परिकल्पना में चंपावत हर क्षेत्र में मजबूत और समग्र होगा

आदर्श जिला चंपावत का बीस सूत्री कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगातार प्रथम स्थान हासिल करना बड़ी उपलब्धि है। इससे स्पष्ट होता है कि जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बेहतर काम हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में विभिन्न विकास कार्यों को गति देने के लिए अच्छे प्रयास किए गए हैं। हालांकि, अभी भी जरूरत है कि सरकार की योजनाओं का लाभ पूरी तरह से धरातल पर आम लोगों तक पहुंचे और पात्र लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिले। डॉ. बीडी सुतेड़ी, शिक्षाविद्, चंपावत

जिले की स्थापना के साथ ही चंपावत ने विकास की रफ्तार पकड़ी, जो बदस्तूर जारी है, इन वर्षों में जनपद के विकास के संदर्भ में प्रशंसनीय कार्य हुए हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का होना बड़ी उपलब्धि है। मेडिकल काॅलेज और कृषकों के लिए कोल्ड स्टोरेज को खोलना समझदारी होगी। साथ ही खेलों को विस्तार देने के लिए प्रत्येक ब्लाॅक में एक आधुनिक स्टेडियम और बेहतर मिनी स्टेडियम को भी प्राथमिकता के आधार पर तैयार किए जाने की जरूरत है।

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डॉ. कमलेश शक्टा, प्राध्यापक एवं पर्यावरणविद्, राजकीय महाविद्यालय बनबसा

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