उत्तर भारत के प्रमुख मां पूर्णागिरि मेले में पानी की कमी श्रद्धालुओं की सेहत पर भारी पड़ रही है। धाम क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी करने को कई दुकानदार बेखौफ दूषित नाले का गंदा पानी यात्रियों को पिलाकर उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं, सब कुछ जानते हुए भी मेला प्रशासन एवं जल संस्थान अनजान बना है।
पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में पानी का संकट श्रद्धालुओं की सेहत पर असर डाल रहा है। पानी की जरूरत पूरी करने को भैरव मंदिर क्षेत्र के अलावा टुन्यास एवं कटौजिया क्षेत्र के कई व्यापारी सेलागाड़ नाले के गंदे पानी का बेरोकटोक उपयोग कर रहे हैं। नाले का गंदा पानी खींचने को दुकानदारों ने निजी पाइप लाइन बिछाकर पावरफुल टुल्लू पंप लगाए हैं। नाले के पास दो हजार लीटर के प्लास्टिक टैंक भी लगाए गए हैं, जिनमें धीरे-धीरे पानी जमा होता है और फिर टैंक भरने पर टुल्लू पंप से पानी खींचा जाता है। नाले का पानी इतना दूषित है कि उसे पीने के उपयोग में लाना तो दूर स्नान आदि के लिए भी प्रयोग करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भैरव मंदिर से ऊपर की दुकानों के शौचालयों एवं बाथरूमों के पानी की निकासी इसी नाले में होती है। बताते हैं कि इस नाले के पानी का उपयोग व्यापारी खुद तो नहीं करते, लेकिन दर्शन को आने वाले यात्रियों के पानी की जरूरत इसी से पूरी कर रहे हैं। बताया जाता है कि गंदा पानी पिलाकर यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ करने का यह खेल वर्षों से चल रहा है। विगत सालों में प्रशासन कई बार छापा मारकर नाले में लगाई गई पाइप लाइन एवं टुल्लू पंपों को जब्त कर चुका है, लेकिन दुकानदार फिर भी हरकत से बाज नहीं आए। पूछे जाने पर जल संस्थान के एई प्रेमजी श्रीवास्तव ने कहा कि दुकानदारों द्वारा गंदे पानी के उपयोग की शिकायत मिली है और कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
ऐसे दुकानदारों पर कार्रवाई होगी
मेला क्षेत्र में गंदे नाले के पानी के प्रयोग की शिकायत तो अब तक नहीं मिली है, लेकिन ऐसा है तो इसकी जांच कराकर ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। -राजेश कुमार, मेला अधिकारी, पूर्णागिरि मेला।