चंपावत। लधिया घाटी क्षेत्र को इस साल मानसून में बाढ़ से राहत मिल जाएगी। भू-कटाव रोकने के लिए यहां 11 करोड़ रुपये की लागत से तीन ग्राम पंचायतों में तेजी से बाढ़ सुरक्षा के काम चल रहे हैं। दो महीने के भीतर 55 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। बाकी कार्य 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है।
लधिया घाटी धान, गेहूं से लेकर खेती के लिए प्रसिद्ध है लेकिन लधिया और रतिया नदी के उफान पर आने पर बाढ़ से खेती बर्बाद हो जाती है। पिछले दो दशक में बाढ़ से फसलों की बर्बादी और लधिया घाटी की 300 नाली खेती योग्य जमीन के अलावा बड़े पैमाने पर भू-कटाव हो चुका है। मुख्य रूप से घाटी की तीन ग्राम पंचायतें गागरी, कुलियाल गांव और परेवा प्रभावित होती रही हैं। इस साल बारिश के मौसम से पहले लधिया घाटी में बाढ़ सुरक्षा के स्थायी बंदोबस्त हो जाएंगे। इसके मद्देनजर 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाढ़ से बचाव के लिए योजना का एलान किया था। तीनों ग्राम पंचायतों में 1280 मीटर की बाढ़ सुरक्षा दीवार के अलावा नाले का निर्माण होना है। करीब 55 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है।
लधिया घाटी में बाढ़ सुरक्षा के कार्यों की लागत और प्रगति एक नजर में
गागरी ग्राम पंचायत: 430 मीटर सुरक्षा दीवार, लागत 407.37 लाख रुपये। 50 प्रतिशत काम पूरा हुआ।
कुलियालगांव ग्राम पंचायत: 425 मीटर सुरक्षा दीवार, लागत 402.63 लाख रुपये। 40 प्रतिशत काम पूरा हुआ।
परेवा ग्राम पंचायत: 425 मीटर सुरक्षा दीवार के अलावा 180 मीटर सुरक्षा दीवार की ऊंचाई बढ़ेगी, लागत 306.52 लाख रुपये। 95 प्रतिशत काम पूरा हुआ।
लधिया घाटी में लधिया नदी से होने वाले भू-कटाव को रोकने के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। 11 करोड़ रुपये से होने वाले यह काम 31 मार्च तक पूरे कराने का लक्ष्य है। - आरडी भट्ट, एई, सिंचाई विभाग, लोहाघाट।