बीस वर्ष बाद नेपाल के तीन राज्यों में होने वाले पहले चरण के स्थानीय निकाय चुनाव का प्रचार बृहस्पतिवार देर शाम से बंद हो गया। चुनाव के मद्देनजर वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल के अलावा सेना को भी सतर्क किया गया है।
चुनाव संपन्न कराने को कर्मचारियों की टोलियां चुनाव सामग्रियां लेकर विभिन्न मतदान केंद्रों में पहुंचने लगी हैं। इधर, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी नेपाल में होने वाले चुनाव के मद्देनजर सीमा पर निगरानी बढ़ाई है।
नेपाल के राज्य संख्या 3, 4 और 6 के 34 जिले में 14 मई को पहले चरण के निकाय चुनाव होने हैं। नेत्र विक्रम चंद उर्फ विप्लव गुट द्वारा चुनाव का विरोध करने की आशंका के चलते नेपाल सरकार ने प्रशासन को सतर्क किया है। इसके लिए सरकार ने पहली पंक्ति में पुलिस, दूसरी में सशस्त्र पुलिस बल और तीसरी में सेना को लगाया है।
बताया जा रहा है कि नेपाल में बीस वर्ष बाद हो रहे इस चुनाव में कई अंडरग्राउंड नेताओं द्वारा भी शिरकत की जा रही है। कई अंडरग्राउंड नेता बंदूक छोड़ देश की मुख्यधारा से जुड़कर चुनाव का रास्ता अपना रहे हैं। पहले चरण के चुनाव प्रचार के दौरान नेपाल में झड़प और खून खराबा होने की भी आशंका है।
प्रमुख निर्वाचन आयुक्त अयोध्या प्रसाद यादव ने पहले चरण के चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसक घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं को हिंसा से बचने की हिदायत दी है। कहा है कि सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को संयम बरतने और देश में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने में सहयोग करना चाहिए।
उधर, नेपाल में होने वाले चुनावों के मद्देनजर सीमा पर सुरक्षा बलों को अलर्ट किया गया है। सीओ राजन सिंह रौतेला ने कहा कि एसएसबी के अलावा पुलिस को भी सीमा पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।