लोहाघाट (चंपावत)। भारत-नेपाल सीमा का विभाजन करने वाली महाकाली नदी के तट पर स्थित नगरूघाट में कोरोना महामारी के चलते मेला आयोजित नहीं हुआ। इससे लोगों में काफी निराशा रही। देर रात तक नगरूघाट में गांवों से देव जत्थों के आने का क्रम जारी रहा।
कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर सोमवार को सूर्योदय से पहले श्रद्धालुओं ने पर्व स्नान कर भगवान नागार्जुन के दर्शन किए। रविवार की देर रात सल्टा, बगोटी, जमरसों से जहां देव रथ पहुंचे, वहीं सुनकुरी, लेटी, पासम, मजपीपल गांवों से आए देवरथों और जत्थों ने टार्चों, लालटेनों की रोशनी में मंदिर पहुंचकर बारी-बारी से मंदिर की परिक्रमा की। नागार्जुन देवता के धामी को श्रद्धालुओं की ओर से कंधों में बैठाकर मंदिर में लाया गया। कोरोना के चलते इस साल नगरूघाट में मेला आयोजित नहीं हुआ। अलबत्ता कार्यक्रम में शांति, सुरक्षा के लिए पुलिस का बंदोबस्त किया गया था।
आयोजन समिति अध्यक्ष जगदीश कलौनी, डॉ. सतीश चंद्र पांडेय ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन किया गया। हर गांव से 10 से 11 लोग ही देव रथों और जत्थों को नगरूघाट ले गए। सचिव भुवन भट्ट, विक्रम सामंत, कमल बोहरा, रमेश चंद, बद्री सिंह सौन, चंद्रकांत तिवारी, राजपाल सामंत, महेश राम, खष्टीबल्लभ पांडेय आदि रहे। संवाद
शारदा घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
टनकपुर (चंपावत)। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को टनकपुर के शारदा स्नान घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने शारदा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। कई लोग बिना मास्क के स्नानघाट पहुंचे। वहीं स्नानघाट पर सामाजिक दूरी का भी पालन होता नजर नहीं आया। घाट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जल पुलिस दिनभर तैनात रही। संवाद