फड़ में जूते-चप्पल, कपड़े बेचने वाले गोविंद खर्कवाल ने 22 मार्च के बाद से एक भी रुपये की कमाई नहीं की है। ऊपर से फड़ के सामान के लिए किराये में लिए गए गोदाम का किराया जेब से जा रहा है। कहते हैं कि 22 मार्च को लगे जनता कर्फ्यू के बाद से दुकान नहीं खुल सकी। घर का खर्च किसी तरह पहले की जमा पूंजी से चल रहा है, लेकिन दुकान बंद होने से कारोबार की कमर टूट रही है।
चंपावत जिले में 700 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनकी रोजी-रोटी फड़ में लगाई दुकान से चलती है। अब ये दुकानें बीते एक माह से बंद हैं। फड़ लगाकर स्टोव, कुकर मरम्मत करने वाले नसीम ने कुछ दिन पहले ही दुकान खोली है। कहते हैं कि आम दिनों में 120 रुपये रोज कमाई होती थी, लेकिन लॉकडाउन में ये रकम भी मारी गई। गांधी मूर्ति के सामने जूता-चप्पल बेच घर चलाने वाले दिव्यांग लक्ष्मीदत्त थ्वाल के हाल भी अलग नहीं हैं। लॉकडाउन में दुकान बंद होने से रोजी नहीं रही। गोदाम के किराये के लिए भी जुगाड़ करना पड़ रहा है।
इसी तरह के हाल हेयर ड्रेसर मोहम्मद इकबाल के भी हैं। 22 मार्च से दुकान बंद है। न कमाई हो रही और नहीं वक्त कट रहा है। दुकान के किराये से लेकर खाने तक के लिए रुपयों का जुगाड़ करना इकबाल के लिए चुनौती बनी है। कहते हैं कि कोरोना के खतरे से बचाव के लिए सभी उपाय उठाए जाए, साथ ही ऐसा कोई रास्ता निकले कि उनकी रोजी-रोटी भी चल सके।
वाहन नहीं चलने से खाली हाथ बैठे हैं मोटर मैकेनिक
चंपावत। जिले में लॉकडाउन के दूसरे चरण में जहां मोटर मेकेनिकों को दुकानें खोलने की अनुमति प्रदान कर दी गई है। वहीं अन्य वाहनों के न चलने से मेकेनिक दुकानों में खाली हाथ बैठे हुए हैं। लॉकडाउन के पहले चरण में जहां दुकानें पूरी तरह से बंद होने के कारण मोटर मेकेनिकों की आमदनी प्रभावित रही। वहीं वर्तमान में केवल सरकारी और आवश्यक सेवाओं वाले वाहन चलने के कारण मरम्मत के लिए आ रहे हैं। जिस कारण कारीगरों को खाली हाथ रहना पड़ रहा है।
कुमाऊं मोटर्स वर्क्स के गुड्डू के अनुसार लॉकडाउन से पूर्व तक उनकी दुकान में आठ मेकेनिक काम करते थे, जिन्हें पर्याप्त काम मिलता था। वर्तमान में दुकान में पांच ही मेकेनिक हैं, वह भी खाली हाथ हैं। इस संबंध में कुमाऊं टैक्सी यूनियन महासंघ की ओर से जिले के आंतरिक मार्गों में टैक्सी वाहनों के संचालन की अनुमति प्रदान करने की मांग उठाई गई है। यूनियन महासंघ उपाध्यक्ष ललित मोहन भट्ट का कहना है कि आंतरिक मार्गों में टैक्सी वाहनों का संचालन कर आम लोगों के साथ ही वाहन चालकों को राहत पहुंचाई जा सकती है।