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चाय फैक्ट्री बनना तो दूर, तीन साल में भवन का काम भी शुरू नहीं

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चंपावत में किराये में चल रही चाय की फैक्ट्री। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। सेहत ही नहीं स्वाद से भी भरपूर जैविक चाय के लिए मशहूर चंपावत अपनी जमीन पर चाय फैक्ट्री को भी तरस गया है। और वह भी तब, जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 2017 में चंपावत में चाय की फैक्ट्री लगाने की बाकायदा घोषणा की थी। लेकिन ये काम पूरा होना तो दूर, अभी शुरू तक नहीं हो सका है। वैसे सीएम की चंपावत जिले के लिए की गई अब तक 96 घोषणाओं में से 15 ही पूरी हो सकी है।
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चंपावत (छीड़ापानी, सिलिंगटाक, च्यूराखर्क, मुड़ियानी, लमाई, चौकी, भगाना भंडारी, लधौन, मौराड़ी, नरसिंह डांडा, गड़कोट, चौड़ा, मझेड़ा, मंच, खूना, बलाई, डिंगडई, बापरू, कठनौली) में करीब 227 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चाय के बागान है। इससे करीब चार सौ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। यहां की लंबी पत्ती वाली चाय न केवल कोलकाता चाय बोर्ड में नीलामी के लिए जानी है, बल्कि यूएसए तक खुशबू बिखेर रही है। यूएसए के यंग माउंटेन टी संस्था ने इस साल 1834 क्विंटल चाय खरीदी।
अर्थव्यवस्था में मदददगार होने के अलावा उत्पादन की क्षमता को देखते हुए सीएम रावत ने 2017 में चाय की फैक्ट्री की घोषणा की। इस फैक्ट्री में एक शिफ्ट में 10 हजार किलो चाय प्रोसेस की जा सकती है। जमीन मिलने के बावजूद बजट आवंटित नहीं होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है।
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फिलहाल किराये में है चाय फैक्ट्री
चंपावत में 2013 में एक चाय फैक्ट्री स्थापित की गई थी। चाय बोर्ड के चंपावत के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि केएमवीन परिसर में किराये में चल रही इस फैक्ट्री में एक शिफ्ट में छह हजार किलो चाय प्रोसेस होती है। आमतौर पर इस फैैक्ट्री में करीब एक लाख किलो चाय तैयार हो पाती है।
मुख्यमंत्री की चंपावत के लिए वर्षवार घोषाणाएं:
2017- 35
2018- 02
2019- 51
2020- 08
कोट
-चाय की फैक्ट्री के लिए जिलाधिकारी के द्वारा 13 नाली एक मुट्ठी जमीन का हस्तांतरण किया गया है। साथ ही सीएनडीएस से 392.69 लाख रुपये की कार्ययोजना तैयार कर उद्यान एवं रेशम अनुभाग को भेजी गई है। बजट आने पर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।
सतीश शर्मा,
जिला उद्यान अधिकारी।
-चंपावत में चाय के बागान पर्यटन के साथ महिला रोजगार और आय संवर्धन का मॉडल है। इसी वजह से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यहां चाय फैक्ट्री स्वीकृत की। जमीन का चयन एक साल पहले ही हो चुका है। फैक्ट्री भवन के लिए जल्द से जल्द बजट के प्रावधान कराए जा रहे हैं।
कैलाश गहतोड़ी,
विधायक, चंपावत।
-चाय की खेती चंपावत की पहचान रही है। इसने महिला सशक्तीकरण और रोजगार के अलावा पर्यावरण संवर्धन और पर्यटन को आगे बढ़ाने का काम किया है। मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा करने में हो रही देरी भाजपा सरकार की गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
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हेमेश खर्कवाल, पूर्व विधायक, चंपावत।
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