सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में संचार और लो-वोल्टेज की समस्या तो दूर हो गई है, लेकिन इस बार बारिश कम होने से मेले के दौरान पानी का संकट पैदा हो सकता है। कम बारिश की वजह से स्रोतों के रिचार्ज न होने के कारण गर्मी शुरू होते ही स्रोतों में पानी घटने की आशंका जताई जा रही है, मगर विभाग मेले के दौरान पानी के संकट से निपटने को अभी तक कोई कारगर व्यवस्था नहीं बना पाया है, जिससे व्यापारी और पुजारी खासे चिंतित हैं।
पूर्णागिरि धाम की पेयजल व्यवस्था के बुरे हाल है। हालांकि गत वर्ष भैरव मंदिर में ट्यूबवेल लगने से कुछ राहत मिली, लेकिन गर्मी शुरू होते ही पानी को लेकर हाहाकार मचने लगता है। बीते दो सालों से धाम में मेले के दौरान पानी का संकट पैदा होता आया है, जिसकी वजह पेयजल योजनाओं के मुख्य स्रोतों में पानी का घटना रहता है। इस साल तो वैसे भी बारिश कम होने से जलस्रोत पूरी तरह रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। बनबसा बैराज के अटेंडेंट जगदीश श्रीवास्तव के मुताबिक वर्ष 2014 में 3458 एमएम बारिश हुई थी, जबकि वर्ष 2015 के वर्षाकाल में सिर्फ 1551 एमएम ही बारिश हुई है। कम बारिश का असर इस बार मेले के दौरान पानी संकट के रूप में सामने आ सकता है। पुजारी और व्यापारी पहले ही प्रशासन और जल संस्थान को इस बाबत आगाह कर चुके हैं, लेकिन विभाग ने पानी के संकट से निपटने की फिलहाल कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई है।
मंदिर समिति अध्यक्ष किशन तिवारी और पूर्णागिरि व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय कहते हैं कि समय रहते कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो मेले के दौरान पूर्णागिरि में पानी के लिए हाहाकार मच सकता है। उनका कहना है कि मोटर रोड़ क्षेत्र में तो टैंकरों से जलापूर्ति हो सकती है, लेकिन भैरव मंदिर से काली मंदिर तक पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कर पाना संभव नहीं होगा।
संकट पर टैंकरों से पूरी की जाएगी पानी की जरूरत
पूर्णागिरि धाम में शारदा से पंपिंग योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन इसे मंजूरी मिलने के बाद भी बनने में काफी वक्त लगेगा। फिलहाल तो मौजूदा योजनाओं के स्रोतों में पर्याप्त पानी है, लेकिन मेले के दौरान पानी के संकट की स्थिति पैदा हुई तो टैंकरों से जलापूर्ति कर पानी की जरूरत को पूरा किया जाएगा। -प्रेमजी श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, जलसंस्थान टनकपुर।