मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी है। नवरात्र की चतुर्थी पर रविवार को भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। करीब साठ हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। वहीं, मेला क्षेत्र में पानी की समस्या गहराती जा रही है। मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम नरेश दुर्गापाल और सीओ आरएस रौतेला भी लगातार मेला क्षेत्र में डेरा जमाकर व्यवस्थाओं पर नजर रखे हैं।
उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध पूर्णागिरि मेले में पहले दिन से ही भक्तों की लगातार आवाजाही का सिलसिला बना है। इधर, जलस्रोतों में पानी घटने से भैरव मंदिर, टुन्यास, झूठे का मंदिर, सिद्धमोड़ और काली मंदिर में पानी का संकट गहराने लगा है। वहीं अगले कुछ दिनों में पानी का संकट और गहराने से व्यापारी खासे चिंतित हैं। जलसंस्थान के अपर सहायक अभियंता बीएस कुवार्बी ने बताया कि फिलहाल पानी का संकट गहराने पर टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि भीड़ के मद्देनजर समूचे मेला क्षेत्र को तीन जोन में बांटकर जलापूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि पानी की चोरी रोकने को सप्लाई प्वाइंट को लोहे की जाली से बंद किया गया है।
बाबा सिद्धनाथ से भी गांठ बांधकर मांगी जाती है मन्नत
मां पूर्णागिरि धाम की तर्ज पर नेपाल स्थित बाबा सिद्धनाथ के मंदिर में भी गांठ बांधकर मन्नत मांगी जाती है। मान्यता है कि मां पूर्णागिरि की तीर्थयात्रा बाबा सिद्धनाथ के दर्शन से ही पूरी होती है। यहीं वजह है कि पूर्णागिरि के दर्शन उपरांत श्रद्धालु बाबा सिद्धनाथ के दर्शन के लिए नेपाल का रुख करते हैं। बाबा सिद्धनाथ के खल्ला नामक स्थान पर स्थित मंदिर के पुजारी पं. दिवाकर चटौत का कहना है कि गांठ लगाकर मन्नत मांगने और मन्नत पूरी होने पर पुन: दर्शन के लिए आकर गांठ खोलने की परंपरा है।
मेला क्षेत्र की सफाई व्यवस्था का बुरा हाल
मां पूर्णागिरि के दर्शन को रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन मेला क्षेत्र में चारों तरफ गंभीर फैली है, और मेले की आयोजक संस्था जिला पंचायत को इससे कोई सरोकार नहीं है। प्रवेश द्वार ठुलीगाड़ में कई भंडारे चल रहे हैं। भंडारों के प्रसाद के पत्तल और झूठन सड़क पर बिखरे होने से आवाजाही करते यात्रियों को परेशानी हो रही है। मेला क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत द्वारा न तो नियमित सफाई कराई जा रही है, और न ही कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। रविवार को जिला पंचायत के मेला कैंप कार्यालय में दो कर्मचारी मौजूद थे। बताया गया कि मेला अधिकारी एएमए कभी कभार ही मेला क्षेत्र में आते हैं।
बंद नहीं हुई शॉर्टकट रास्तों से आवाजाही
मेला प्रशासन ने भले ही शॉर्टकट रास्तों को टिन लगाकर बंद कर दिया है, लेकिन यात्री इन रास्तों से आवाजाही का जोखिम उठाना नहीं छोड़ रहे हैं। लगाए टिन के अगल-बगल से पार होकर कई यात्री अब भी जल्द पहुंचने के फेर में शॉर्टकट रास्तों से आवाजाही का जोखिम उठा रहे हैं। सीओ आरएस रौतेला का कहना है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों से भी शॉर्टकट रास्तों के जोखिम के बारे में यात्रियों को बताया जा रहा है, लेकिन कुछ लोग इन रास्तों से जाना नहीं छोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि पीआरडी की गश्त बढ़ाकर जल्द इन रास्तों से आवाजाही पूर्णरूप से बंद कराई जाएगी।