सियासी दंगल को देखने के लिए टीवी पर गड़ाए रहे नजरें
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प्रदेश सरकार को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच शनिवार दिन भर कयासों का दौर जारी रहा। लोगों की नजर टेलीविजनों पर टिकी रही। देहरादून से लेकर दिल्ली तक पल-पल बदल रहे राजनीतिक समीकरणों को जानने की उत्सुकता लोगों में बनी रही। तमाम लोग ताजा राजनीतिक हालात को जानने के लिए अमर उजाला कार्यालय भी फोन करते रहे। वहीं शनिवार का दिन सरकारी विभागों में भी काम से ज्यादा राजनीतिक गहमागहमी को जानने में बीता। अलबत्ता जिले के दोनों विधायक मजबूती से अपनी-अपनी पार्टी लाइन में डटे हुए हैं।
हरीश रावत की सरकार पर मंडराए खतरों के बीच शनिवार को जबर्दस्त गहमागहमी रही। चंपावत के विधायक और संसदीय सचिव हेमेश खर्कवाल शनिवार को देहरादून में रावत सरकार को बचाने के लिए साथी कांग्रेसी विधायकों के साथ रणनीति बनाते रहे। वहीं भाजपा से ताल्लुक रखने वाले लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने कहा कि रावत सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सहित कांग्रेस के बागी 9 विधायक पूरी तरह सरकार के खिलाफ लामबंद हैं और ये संख्या बढ़ सकती है। सरकार विपक्षियों के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बजाय शत्रुवत बर्ताव कर रही थी। जिसका खामियाजा सरकार को इस रूप में भुगतना पड़ा है। वहीं आमतौर पर क्रिकेट मैच के दौरान टीवी से चिपके रहने वाले लोग भी सियासत के बदलते रंग जानने को जमे रहे। अलबत्ता आम लोग सियासत की इस उठापटक को सेहतमंद राजनीति और प्रदेश के हितों के खिलाफ बता रहे हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि रावत सरकार को विधानसभा में विश्वास मत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।