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UK News: बंदूक चलाने वाले हाथों ने रोपीं उम्मीदें तो कुदरत ने लुटाया प्यार, पूर्व सैनिक ने ऐसे किया नवाचार

Mon, 01 Sep 2025 02:15 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत

सार

चंपावत जिले में पूर्व सैनिक रमेश चंद्र खर्कवाल 27 साल से बंजर भूमि को सींच कर लाखों की आय कमा रहे हैं। 50 नाली भूमि को उन्होंने अपनी मेहनत से हरा भरा कर दिया है और वह आज गांव के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
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सेब की खेती दिखाते पूर्व सैनिक रमेश चंद्र खर्कवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंपावत जिले के सुईं खैसकांडे निवासी 74 वर्षीय पूर्व सैनिक रमेश चंद्र खर्कवाल 27 साल से बंजर भूमि को सींच कर लाखों की आय कमा रहे हैं। 50 नाली भूमि को उन्होंने अपनी मेहनत से हरा भरा कर दिया है और वह आज गांव के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

पूर्व सैनिक रमेश चंद्र खर्कवाल वर्ष 1998 में सेवानिवृत्त होने के बाद अपने गांव पहुंचे। उनके पास अन्य सरकारी सेवाओं में जाने का मौका था, लेकिन उन्होंने अपने पूर्वजों के खेतों को सींचने का मन बनाया। उन्होंने सब्जी उत्पादन का काम शुरू किया। वर्तमान में वह खेती के साथ ही बागवानी भी कर रहे हैं। उन्होंने सेब के 1200, कीवी के 170, चेरी के 10, खुमानी के 20 पेड़ लगाए हैं। बगीचे में कागजी नींबू, आड़ू, अखरोट के पेड़ भी हैं। इसके अलावा सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं। उनके उत्पाद पूरी तरह कैमिकल मुक्त यानी जैविक हैं। वह खुद का जीवामृत तैयार करते हैं। हर एक पौध तक अंडर ग्राउंड तकनीक से जीवामृत पहुंचाई जाती है। पूर्व सैनिक रमेश ने 27 साल के खेतीबाड़ी के अनुभव को अपने खेतों में भी लागू किया है। वह हर साल लाखों की आय करने के साथ ही लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

जल संरक्षण को भी दिया बढ़ावा

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पूर्व सैनिक रमेश जल संरक्षण को भी बढ़ावा दे रहे हैं। बारिश के पानी को एकत्र कर वह अपने खेतों को सींचते हैं। उन्होंने अपने खेतों में करीब पांच बरसाती टैंक लगाए हैं। 50 नाली भूमि पर बांज के पेड़ों के साथ ही फूल, पान आदि भी उगाए हैं।

सालाना कर रहे आठ लाख की आय
पूर्व सैनिक अपनी पत्नी खीमा देवी (70) के साथ मिलकर 50 नाली भूमि का सींच कर सब्जी और फल उत्पादन कर रहे हैं। वह उत्पाद बेचकर सालाना आठ लाख की आय कर रहे हैं। दोनों का अधिकांश दिन खेतों की देखरेख में बीतता है। उनका कहना है कि पलायन तभी रुकेगा जब लोग गांव में रहकर खेतीबाड़ी करेंगे। वर्तमान में लोग आधुनिक हो गए हैं। एक जमाना था जब लोग कृषि कार्य कर सेहतमंद रहते थे। आज लोग खुद के खेत को बंजर छोड़कर बाजार से सब्जी खरीद रहे हैं।

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