पीलीभीत से टनकपुर को भी बड़ी रेल लाइन से जोड़ने की कवायद युद्ध स्तर पर चल रही है, जिसके तहत रेलवे अपनी भूमि में अतिक्रमण पर जल्द हथौड़ा चला सकता है। हालांकि अतिक्रमण हटाने को लेकर अभी कोई रणनीति तय नहीं हुई है, लेकिन रेलवे जल्द जिला प्रशासन की मदद से कार्रवाई की तैयार कर रहा है। इधर, कार्रवाई को लेकर अतिक्रमणकारियों में भी बेचनी बढ़ने लगी है।
बड़ी रेल लाइन के साथ ही पीलीभीत से टनकपुर के बीच रेलवे स्टेशनों का भी ब्राडगेज के मानकों के तहत जीर्णोद्धार होना है। अंतिम रेल हैड स्टेशन होने से टनकपुर में प्लेट फार्मों के निर्माण से लेकर संटिंग ट्रैक, वर्कशाप, यार्डों और स्टाफ आवासीय कालोनी का भी निर्माण होगा। इसके लिए रेलवे के पास पर्याप्त भूमि हैं, मगर काफी भूमि अतिक्रमण की जद में हैं। रेलवे ने कई बार अतिक्रमण हटाने का प्रयास भी किया, परंतु भूमि का सीमांकन न होने से रेलवे सफल नहीं हो पाया। 18 अक्तूबर 2015 को रेलवे, जिला प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका के अधिकारियों की बैठक में तय हुआ था कि रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने से पहले राजस्व, रेलवे और नगर पालिका ज्वाइंट सर्वे कर भूमि का सीमांकन करेंगे, परंतु अब तक सर्वे नहीं हुआ है।
रेलवे के पीलीभीत में तैनात सीनियर असिस्टेंट इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जल्द होगी। उनके मुताबिक रेलवे की भूमि पर 500 से ज्यादा कच्चे और पक्के मकान बने हैं। स्थानीय प्रशासन की मदद से ही अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भूमि का सर्वे और सीमांकन से पूर्व रेलवे के डीआरएम (तकनीकी), चंपावत के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में बैठक कर फैसला लेना है। उसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी। इधर, एसडीएम नरेश दुर्गापाल का कहना है कि रेलवे को अपनी सर्वे टीम लाकर राजस्व और नगर पालिका की टीम को साथ लेकर भूमि का सीमांकन करने को कहा गया है, लेकिन रेलवे की सर्वे टीम अब तक नहीं आई।