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वेतन के बगैर चल रही रोडवेज की गाड़ी

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रोडवेज बसों की खामी मुसाफिरों के लिए सिरदर्द बन रही है तो रोडवेज कर्मियों को वेतन नहीं मिलने से मुसीबत हो रही है। तीन डिपो वाले टनकपुर क्षेत्र के 1171 कर्मियों को दो माह से वेतन नहीं मिल सका है। रोडवेज कर्मचारी संगठन प्रबंधन को अगाह कर चुके हैं।
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रोडवेज के टनकपुर क्षेत्र में टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़ डिपो हैं। इनमें कार्यरत 1171 (573 स्थाई, 210 संविदा और 388 एजेंसी) कर्मियों को दिसबंर 2019 से वेतन नहीं मिला है। वेतन को लेकर कर्मचारी कई बार प्रबंधन के सम्मुख गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। कर्मचारी नेता मनोज मिश्रा, जगदीश जोशी आदि ने कहा कि वेतन न मिलने से कर्मियों को मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।
इसके बावजूद कर्मचारी रोडवेज की सेवा को सुचारु रखे हुए हैं लेकिन अब जल्द ही वेतन नहीं मिलने पर उन्हें मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ सकता है। इधर रोडवेज के एजीएम वित्त बीसी जोशी का कहना है कि बजट नहीं आने से कर्मियों का वेतन नहीं दिया जा सका है। ये हालत पूरे प्रदेश की है। बजट मिलने पर वेतन दे दिया जाएगा।
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सेवा से हटाया पर नहीं दिया सात माह का मानदेय
चंपावत। बीएसएनएल के 130 से अधिक ठेके के कर्मियों को पिछले साल पहली अक्तूबर से निकाल दिया गया लेकिन उनके मानदेय का बकाया नहीं दिया गया।
चंपावत के अलावा पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, रानीखेत, बागेश्वर क्षेत्र के ठेका कर्मियों को निकाले साढ़े चार माह हो चुके हैं लेकिन उनका मार्च से सितंबर तक सात माह का मानदेय नहीं दिया गया। बीएसनएल कैज्युल कांट्रेक्टर वर्कर्स फैडरेशन के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी, दुर्गादत्त भट्ट, अमर सिंह फर्त्याल, हरीश तिवारी आदि का कहना है कि बीएसएनएल ने कर्मियों के साथ दोहरी मार की है।
उनकी लंबी सेवाओं की अनदेखी कर काम से हटा दिया गया है। वहीं मार्च से सात माह का मानदेय भी नहीं दिया गया है। अब इन कर्मियों ने मानदेय का 28 फरवरी तक भुगतान नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं दूरसंचार अधिकारी विजय बहादुर का कहना है कि बजट की कमी से ठेका कर्मियों के मानदेय को नहीं दिया जा सका है।
प्रेरकों को मानदेय के नाम पर मिल रहा सिर्फ आश्वासन
चंपावत। मार्च 2018 में बंद हो चुकी साक्षर भारत मिशन परियोजना के साक्षरता प्रेरक अपने बकाया 16 माह के मानदेय पाने के लिए जूझ रहे हैं मगर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। प्रेरक संघ के नेता संजय चौड़ाकोटी का कहना है कि प्रेरक बेरोजगार हुए हैं।
उन्हें 16 माह का मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है। चंपावत जिले के 289 लोक साक्षरता केंद्र के 578 प्रेरक और सह प्रेरकों ने निरक्षर लोगों को साक्षर कर परियोजना के लक्ष्य को हासिल करने में मदद की। अब इन प्रेरकों ने भी आंदोलन की राह पकड़ने की बात कही है। इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि बजट मिलने पर प्रेरकों के मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।
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